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कारीगर हथियार बनाते थे, असली गुनहगार कौन

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मेरठ। भामौरी गांव में पकड़ी गई तमंचा फैक्ट्री के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। आखिर लोकसभा चुनाव से पहले वेस्ट यूपी में कौन बवाल कराना चाहता है। जौला गांव मुजफ्फरनगर के कारीगर सिर्फ हथियार बनाते हैं, लेकिन उन्हें किसके द्वारा कहां सप्लाई किया जाना था। इसका जवाब अभी किसके पास नहीं है। लखनऊ के आला अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते इसकी जांच करने में एसटीएफ भी लगा दी।
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सरधना के भामौरी गांव के जंगल में पुलिस ने दबिश देकर तमंचे बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर इसका खुलासा किया था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दो आरोपी अहसान व नसीम मुजफ्फरनगर के जौला गांव के निवासी हैं। दोनों काफी दिनों से हथियार बनाते हैं। बाकी पकड़े गए आरोपी फरमान, दिनेश ठाकुर, अमित गिरी और रमेशचंद हथियार बनने वाले दोनों कारीगर की देखरेख में लगे थे। पुलिस का दावा है कि लोकसभा चुनाव से पहले वेस्ट यूपी के जिलों में खूनखराबा कराने साजिश है।

खेप पकड़ी जाती पर जांच नहीं होती
मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर समेत वेस्ट यूपी के कई जनपदों में लगातार हथियारों की खेप पकड़ी जा रही है। मेरठ जोन में दो साल में करीब एक हजार तमंचे पुलिस बरामद कर चुकी है। तमंचे बनाने का सामान और औजार भी आरोपियों से मिले। पुलिस मौके से पकड़े गए आरोपियों को जेल भेज देती है, लेकिन बाद में सुस्त पड़ जाती है। पुलिस ये जानने की भी कोशिश नहीं करती कि ये अवैध हथियार सप्लाई कहां होते हैं।
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एसटीएफ ने शुरू की जांच
हथियार बनाने वालों से पुलिस भी तमंचे व पिस्टल खरीदती है। इसको देखते पुलिस आरोपियों पर मजबूत कार्रवाई नहीं कर पाती। ऐसे में लखनऊ में अधिकारियों ने इसकी जांच एसटीएफ को दी है। ताकि खुलासा हो सके कि आखिर अवैध हथियार कहां सप्लाई होने थे। एसटीएफ ने हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों की पूरी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

कई जगह हथियार बनने की जानकारी मिल रही है। पुलिस के साथ एसटीएफ को भी लगाया है। हथियार बनाने और सप्लाई करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन
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