बहसूमा। कस्बे के बेरखेड़ा जंगल स्थित खाली खेत में गुपचुप रूप से मुर्गे लड़ाकर सट्टा लगाया जा रहा था। पुलिस ने रविवार को सूचना पाकर छापेमारी की तो दर्जनों युवक अपनी बाइकों और कार आदि को छोड़ फरार हो गए। पुलिस ने चार युवकों एवं एक मुर्गे को कब्जे में लिया है।
थाना प्रभारी अजय चौधरी के मुताबिक कस्बे की पूर्व दिशा में दो किलोमीटर दूर स्थित बेरखेड़ा के जंगल में खाली खेत में बाजी लगाकर मुर्गे लड़ाने की सूचना मिली थी। पुलिस ने छापेमारी की तो उस समय मुर्गे लड़ाने वाले दर्जनों युवक मेरठ एवं आसपास के क्षेत्र से आए हुए थे। यहां दर्शकों का हुजूम लगा हुआ था। पुलिस को देख युवक मुर्गों को लेकर कुछ बाइकें छोड़कर खेतों से फरार हो गए। मौके से चार युवकों को हिरासत में लिया है। ये आरिफ पुत्र मोहम्मद हमीद निवासी सद्दीकनगर मेरठ अशरफ पुत्र इशरत निवासी नंगला हरेरू फलावदा, वसीम पुत्र सलीम निवासी तारापुरी मेरठ एवं एक बहसूमा निवासी है। पुलिस ने मौके से एक मुर्गा, आठ बाइक, एक मारुति वैन एवं एक ठेली एवं दो हजार चार सौ रुपये कब्जे में लिये है। हिरासत में लिये एक युवक ने बताया कि मुर्गा लड़ाने की प्रारंभिक बोली एक हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक चलती है। मुर्गे की आपस की लड़ाई काफी समय तक चल जाती है। हारने वाला मुर्गा बैठ जाता है। मैदान में डटे रहने वाले मुर्गे को विजय घोषित कर दिया जाता है। थानाध्यक्ष अजय चौधरी ने बताया कि तीन युवकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। वहीं, बहसूमा निवासी युवक वहां बतौर दर्शक मौजूद था। इसलिए उसे छोड़ दिया है।
शिप्रा के पति और ससुर को छोड़ा
बहसूमा। कस्बा निवासी व्यापारी वैभव की पत्नी शिप्रा (25) ने शनिवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया था। पुलिस ने शिप्रा के पति वैभव उर्फ कोकिल एवं उसके पिता अशोक को हिरासत में ले लिया था। हालांकि मृतका के परिजनों एव व्यापारी के परिजनों ने पुलिस को शिप्रा के मानसिक रूप से बीमार होने की जानकारी दी थी।
रविवार अपराह्न मृतक शिप्रा का पोस्टमार्टम होकर शव घर पहुंचा तो लोगों ने हिरासत में लिये व्यापारी एवं उसके पिता को छोड़ने की बात कही। वे काफी संख्या में शिप्रा के परिजनों के साथ थाने पहुंचे। काफी देर तक दोनों पक्षों को मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने बाद में उच्चाधिकारियों से वार्ता की तथा मृतका शिप्रा के पिता से लिखित में कोई कार्रवाई नहीं करने की शर्त पर उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद शिप्रा का अंतिम संस्कार किया।