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एक दिन हम अमीर जरुर बनेंगे, देखते रह जाएंगे गांव वाले

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अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ/मोदीपुरम।
दादरी गांव के अनुज ओर उसका भाई सुशील आज अपहरण जैसे मामले में मास्टरमाइंड बन गए। दोनों भाई जरायम की दुनिया में नाम और पैसा कमाना चाहते है। इनके साथ में गांव का ही दोस्त गौरव शर्मा ओर विवेक उर्फ मोदी को भी अपने साथ कर लिया। चारों दोस्त डॉक्टर श्रीकांत गौड़ का अपहरण कर लिया। चारों दोस्त अपहरण के मामले में मास्टर माइंड है। अभी तक इन चारों के खिलाफ स्थानीय थानों में किसी भी तरह के अपराधिक मामले दर्ज नहीं है।

एक दिन हम अमीर बनेंगे और लोग देखेंगे
मोदीपुरम। अनुज और सुशील ने दिल्ली में दो गाड़ी बनाकर ओले कैब में शुरुआत की थी। गांव में जब वह आते थे और अपने यार दोस्तों में बैठते थे, यह जरुर कहते थे कि एक दिन देखना हम अमीर जरूर बनेंगे, गांव वाले देखते रह जाएंगे। ग्रामीणों को भी नहीं पता था कि वह अमीर बनने की चाह रखते है और इस चाह को बढ़ाने के लिए वह किसी का अपहरण भी कर सकते है। इस अपहरण केस के मास्टर माइंड के रुप में चर्चाओं में आए दादरी गांव के सुशील और उसका भाई अनुज दोनों शादी शुदा हैं। पुलिस का मानना है कि जल्द अमीर बनने की वजह से उन्होंने ये कदम उठाया। सुशील के दोस्त दोस्त गौरव की छवि भी गांव में अच्छी नहीं है। विवेक उर्फ मोदी अभी अविवाहित है। चारों अभी पकड़ से दूर है।
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अच्छा था व्यहार, हमे क्या पता ऐसे काम करेंगे
मोदीपुरम। अनुज गुर्जर और सुशील दोनों ही गांव में अच्छे व्यवहार के साथ रहते थे। जब गांव में पहली बार दबिश आयी और अनुज के परिजनों को उठाकर लेकर गई, तब जाकर पता चला कि दोनों भाइयों ने गौरव शर्मा के साथ मिलकर अपराध किया है। डॉ श्रीकांत गौड़ को पूरी प्लानिंग के तहत इन लोगों ने दादरी और पीरपुर गांव के जंगल में एक टयूबवैल पर भी रखा है। ग्रामीणों की माने अपने एक दोस्त की टयूबवैल पर देर रात तक दो गाड़ी खड़ी हुई थी, जब मामला खुला तो पता चला कि डॉक्टर को वहां पर रखा गया था।

रिश्तेदार ,कारोबारी दोस्तों ने बनाया जरायम का गठबंधन
मेरठ। पकडे़ गए बदमाश और मास्टर माइंड सभी लोग एक दूसरे रिश्तेदार और कारोबारी दोस्त हैं। बुधवार को मुठभेड़ के बाद पकड़े गए रामा गार्डन निवासी प्रमोद और मकान मालिक सोहनवीर दोनों पेशे से प्रापर्टी का काम करते हैं। दोनों अच्छे परिचित भी हैं। इस केस के मास्टर माइंड माने जा रहे दादरी के अनुज को ट्रेस कर लिया था। पुलिस को दो दिन पूर्व रामा गार्डन निवासी प्रमोद का पता चला। दिल्ली पुलिस दो दिन पूर्व ही प्रमोद के घर पहुंच गई थी लेकिन वह हाथ नहीं आया। मोहल्ले वालों ने बताया कि उसके मकान के बाहर खड़ी एक सेंट्रो कार की भी पुलिस ने तलाशी ली थी। पुलिस ने कार ले जाने की कोशिश की लेकिन उसका लॉक नहीं खुला। पुलिस ने कार के टायर पंचर कर दिए ।
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मकान मालिक सोहनवीर भी प्रोपर्टी का काम करता है इसी वजह से प्रमोद और सोहनवीर दोनों एक दूसरे के परिचित हैं। सोहनवीर मूल रूप से मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला है। इसलिए पुलिस का मानना है कि सोहनवीर पकडे़ गए मुजफ्फरनगर के कैल गांव के अमित को भी पहले से ही जानता है । पुलिस ये भी मान रही है कि मास्टर माइंड और पकडे़ गए सभी आरोपी दूर की रिश्तेदारी और जान पहचान की वजह से एक दूसरे को जानते हैं। चिकित्सक के अपहरण के बाद अनुज आदि ने चिकित्सक को रखने के लिए एक दूसरे से संपर्क किया और मदद मांगी। चूंकि सोहनवीर की पत्नी और बच्चे घर में नही रहते थे इस वजह से उसने डॉक्टर को अपने घर में रखवाया।
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