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कैंपस में अराजकता: पुलिस, विवि प्रशासन मौन

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मेरठ। सीसीएसयू की सुरक्षा पर सालाना तीन करोड़ खर्च होने के बावजूद यहां कुछ दबंगों का राज है। शुक्रवार को जिस तरह से कैंपस में अराजकता हुई, उससे कैंपस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस घटना के आरोपियों की गिरफ्तारी तो दूर अभी तक एफआईआर तक नहीं हुई।
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यूनिवर्सिटी कैंपस में इस वक्त ढाई सौ होमगार्ड तैनात हैं। यूनिवर्सिटी सुरक्षा कंपनी पर हर साल करीब तीन करोड़ रुपये खर्च करती है। लेकिन इससे पहले कैंपस की सेंट्रल लाइब्रेरी मेेें तोड़फोड़ हो चुकी है। कई बार कैंपस में बाहरी युवक शराब पीते पकड़े जा चुके हैं। शुक्रवार को भी कैंपस में अराजकता के दौरान होमगार्ड वहां से कुछ ही दूरी पर बैठे थे। इसके बावजूद भी उन्होंने किसी को रोकने की कोशिश नहीं की। पहले तो बाहरी युवक कैंपस में कैसे घुस गए। इसके बाद जब छात्रों और उनके बीच मारपीट हुई तो होमगार्ड ने रोकने तक की कोशिश नहीं की। आधा घंटे तक बवाल होता रहा लेकिन होमगार्ड आंखें मूंदे बैठे रहे।
डिग्गी के रास्ते को लेकर भी कोई निर्णय नहीं
किसी भी यूनिवर्सिटी कैंपस में कालोनी के आने-जाने का रास्ता नहीं हो सकता है। लेकिन इसके बाद भी यूनिवर्सिटी कैंपस में डिग्गी से जाने का रास्ता है। इसको लेकर कई बार बंद कराने की बात हो चुकी है। लेकिन यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अफसर ऐसे मुद्दों पर कुछ कहने से बचते रहते हैं।
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छात्र संघ अध्यक्ष से मांगा सहयोग
शुक्रवार को हुए बखेड़े में पुलिस ने छात्र संघ अध्यक्ष विजय सिंह को बुलाकर आरोपियों की पहचान कराने की कोशिश की। लेकिन बात नहीं बनी। विवि प्रशासन भी मौन है। वहीं, मेडिकल पुलिस अपनी तरफ से केस दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। एसओ मेडिकल सतीश कुमार ने बताया कि पीड़ित पक्ष और विवि से तहरीर नहीं मिली। वहीं, छात्र संघ अध्यक्ष ने बताया कि कैंपस में मारपीट की सूचना पर वे पहुंचे थे। लेकिन भीड़ अधिक होने से किसी को नहीं पहचान सके।
नए सत्र से बनाएंगे नई व्यवस्था
कैंपस में दूसरे जिलों के छात्र-छात्राएं काम कराने के लिए आते हैं। ऐसे में प्रवेश पत्र से इंट्री से उन्हें दिक्कत होगी। होमगार्ड की लापरवाही पहले भी सामने आई है। इसको लेकर कुलपति को रिपोर्ट दी जा रही है। नए सत्र से नई व्यवस्था बनवाई जाएगी। -डॉ. भूपेंद्र सिंह, चीफ प्रॉक्टर सीसीएसयू कैंपस
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