मेरठ। वेस्ट यूपी के जिलों में बीमा कंपनी को करोड़ों का चूना लगाने का खेल चल रहा हैं। ट्रक काटकर चोरी में रिपोर्ट लिखवाकर क्लेम ले लिया जाता है। यह धंधा पुलिस की साठगांठ से चल रहा है।
मेरठ जोन के मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और सहारनपुर समेत कई जिलों में एक साल में 154 ट्रक चोरी होना बताया गया। एक साल में 154 ट्रक चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई। जिनमें पुलिस ने इन मुकदमे में एफआर लगा दी। सवाल है कि आखिर पुलिस इस मामले में क्यों चुप्पी साधकर बैठी है। बीमा कंपनी के अधिकारियों ने पुलिस अफसरों से इसकी शिकायत की है।
ऐसा चलता यह खेल
पुलिस के मुताबिक लोन पर ट्रक खरीदा जाता है। तीन-चार साल चलाते हैं और उसको कबाड़ी से साठगांठ करके कटवा देते हैं। उसके बाद सेटिंग करके उसी ट्रक के चोरी होने की सूचना देकर गुपचुप तरीके से रिपोर्ट करा देते हैं। उसकी रिपोर्ट के हवाले से ट्रक मालिक को क्लेम मिल जाता है। लगातार ट्रक चोरी और क्लेम लेकर बीमा कंपनी को करोड़ों का चूना लगाने का धंधा चलाया जा रहा है।
थाने भी फिक्स होते हैं
ये मुकदमे लिखवाने के लिए थाने भी फिक्स होते हैं। पुलिस ने बताया कि कंकरखेड़ा, टीपीनगर, नौचंदी समेत पांच थानों में रिपोर्ट लिखाने की सेटिंग होती है। जिस थाने में साठगांठ हो जाती है, वहीं रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं। मेरठ में एक साल में 30 मुकदमे दर्ज होने बताए हैं। पुलिस इन मुकदमों में एक या डेढ़ माह में एफआर भी लगा देती है। जिसके चलते इन मुकदमे की जानकारी उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती।
अब आसान नहीं होगा
एसएसपी राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि अब ट्रक चोरी के मुकदमे भी सीसीटीएनएस के द्वारा ही दर्ज किए जा रहे हैं। जिसमें अब यह खेल करना आसान नहीं रहा। पहले ऐसे मुकदमे दर्ज हो जाते थे। कंप्यूटर पर सभी मुकदमे दर्ज कराने के सख्त निर्देश हैं। इसका असर भी सामने आ रहा है। मेरठ में पिछले दो महीने में सिर्फ दो मुकदमे ट्रक चोरी के लिखे गए। जिनकी जांच कराई जा रही है।
खास बातें:
- एक साल में 154 ट्रक चोरी होने की लिखी है रिपोर्ट
- पुलिस जांच करके लगाती है मुकदमे में एफआर
- बीमा कंपनी ने पुलिस अफसरों से की शिकायत