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एससीएसटी आयोग में हिंसा की रिपोर्ट सौंपी

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एससीएसटी आयोग में हिंसा की रिपोर्ट सौंपी
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मेरठ। एससीएसटी आयोग में एडीजी मेरठ जोन और एसएसपी मेरठ ने दो अप्रैल को हुई हिंसा की रिपोर्ट सौंप दी। पुलिस के खिलाफ आयोग में दर्ज शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने जाति पूछ पूछकर लोगों को पकड़ा था। हालांकि पुलिस ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।
दो अप्रैल को हुए उपद्रव के मामले में महापौर सुनीता वर्मा समेत करीब 200 लोगों ने मेरठ पुलिस के खिलाफ एससी-एसटी आयोग में शिकायत की थी। जिस पर एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार और एसएसपी मंजिल सैनी मंगलवार को एससी-एसटी आयोग में पेश हुए थे। जहां पर दोनों का पक्ष सुना गया। शिकायत कर्ता सुनीता वर्मा ने आरोप लगाए कि दलितों पर जुर्म किया गया है। उनका शोषण हुआ। कई वीडियो भी प्रस्तुत की। इसका जवाब एसएसपी ने दिया। एसएसपी ने बवाल की वीडियो क्लिप और मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया। कहा कि दो अप्रैल को करीब 300 से अधिक गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। दर्जनों वाहन आरोपियों ने फूंके। मौके से जो लोग पकड़े गए उनको जेल भेजा गया। दो अप्रैल के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में कोई दबिश नहीं दी। आरोपियों के खिलाफ तमाम सुबूत हैं।
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योगेश वर्मा गिरफ्तार करते ही शांत माहौल
एसएसपी मंजिल सैनी के अनुसार उन्होंने आयोग को जानकारी दी कि बसपा नेता योगेश वर्मा जहां-जहां गए, वहां-वहां बवाल होता गया। पुलिस ने योगेश वर्मा को गिरफ्तार किया तो माहौल खुद शांत हो गया। इससे साफ जाहिर होता है कि योगेश वर्मा ने ही यह बवाल कराया है। उन्होंने लोगों को उकसाया था।


खास बातें:
महापौर समेत 200 लोगों ने पुलिस के खिलाफ की थी शिकायत
एडीजी जोन व एसएसपी मेरठ ने आयोग में पेश होकर दिए जवाब
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