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मातम कर इमाम हुसैन की शहादत का मकसद बयां किया

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मेरठ..कंवलजीत..बुढ़ाना गेट से निकले मोहर्रम के जुलुस में मातम करते सोगवार......संवाद
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मेरठ। मोहर्रम की पांचवीं तारीख को या हुसैन, या अब्बास की सदाओं के बीच बुढ़ाना गेट स्थित इमाम बारगाह मोहम्मद अली खां से चार बजे जुलजनाह का कदीमी जुलूस बड़ी अकीदत के साथ बरामद हुआ। इसमें झूला हजरत अली असगर व अलम-ए-मुबारक शामिल रहे। शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए हुसैनी सोगवारों और अंजुमन फौजे हुसैनी जै़दी फार्म सहित अंजुमन इमामिया, अंजुमन दस्तए हुसैनी और तंजीम-ए-अब्बास के सफदर अली, काशिफ जै़दी, दारेन, जिया जै़दी ने नौहेख्वानी व मातम करके इमाम हुसैन की शहादत का मकसद बयां किया।
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जुलूस अपने निर्धारित रास्तों से होते हुए देर रात इसी इमामबारगाह पहुंचकर संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में हुसैनी सोगवार शरीक रहे। इसके अलावा मंजूर हुसैन के अजाखाने कोटला से 12 बजे गश्ती जुलजनाह बरामद होकर गली बाजार कैंचीवालान से गुजरकर वापस इसी स्थान पर पहुंचा। मोहर्रम कमेटी के मीडिया प्रभारी अली हैदर रिजवी ने बताया कि छह मोहर्रम (2 जुलाई) को दरबारे हुसैनी जै़दी फार्म में दिलबर जैदी के प्रबंध में अलम-ए-मुबारक और शहर में इमामबारगाह तकी हुसैन बाजार पेड़ामल से चार बजे जुलूस-ए-जुलजनाह बरामद होगा।

नबियों को इंसानियत के कारवां का नेतृत्व करने के लिए भेजा गया
मेरठ। लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला में अशरा पढ़ने आए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी कहा कि हर दौर में जब इंसानियत का कारवां गुमराही के अंधेरे में भटकने लगा तो कायनात के मालिक ने अपने चुने हुए नबियों को इंसानियत के कारवां का नेतृत्व करने के लिए भेजा। जब फिरौन का दरबार जादूगरों से भरा हुआ था तो नबी मूसा को वह छड़ी दी गई जो अजगर की शक्ल में बदल गई और जादू तथा जादूगरों को निगल गई। जब चिकित्सा और ज्ञान की चर्चा आम हो गई तो नबी ईसा को मृतकों को जीवित करने और लाइलाज बीमारियों को ठीक करने का चमत्कार दिया गया। नबियों के सरदार हजरत मुहम्मद मुस्तफ़ा को भेजा गया तो पवित्र कुरान दिया गया जो बाकी दुनिया के लिए दिव्य ज्ञान, बुद्धि और प्रकाश का खजाना है। अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन की बहन हज़रत जैनब के साहबजादे की दिल दहला देने वाली शहादत का बयान किया। मोहर्रम कमेटी महिला विंग की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि मनसबिया की मजलिस के बाद जुलूस ए जुलजनाह कोतवाली थाना के बुढ़ाना गेट स्थित इमामबारगाह नवाब मोहम्मद अली खां से बरामद होकर सत्यम पैलेस रोड से गुजरता हुआ लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला पहुंचा। वहां शहर की सभी मातमी अंजुमनों ने नौहेख्वानी की और मातम किया।
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