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कपसाड़ कांड: आरोपी पारस की उम्र पर फैसला सात फरवरी को, रूबी पक्ष ने मांगा समय

Thu, 05 Feb 2026 12:18 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के कपसाड़ गांव की रूबी के अपहरण और उसकी मां की हत्या के आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर अदालत सात फरवरी को निर्णय सुनाएगी। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के पुराने शैक्षिक रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय मांगा है।

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कपसाड़ हत्याकांड, रूबी व पारस दाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के कपसाड़ गांव की रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के आरोपी पारस सोम की उम्र पर अदालत अब सात फरवरी को निर्णय सुनाएगी। बुधवार को अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एससीएसटी एक्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। 

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इस दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी के कक्षा पांच के शैक्षिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए लेकिन इस रिकार्ड में भी पारस की जन्म तिथि 11 मई 2008 मिली। यही जन्मतिथि उसकी हाईस्कूल की मार्कशीट में 11 मई 2008 दर्ज है। आरोपी के अधिवक्ता संजीव राणा ने दोनों प्रमाणपत्रों में एक ही जन्म तिथि पाए जाने पर पारस को नाबालिग बताते हुए उसका मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में चलाने की मांग की। 

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इस पर अभियोजन पक्ष (रूबी पक्ष) ने अदालत से पारस का चौथी कक्षा तक का रिकार्ड देने के लिए समय मांगा। अदालत ने वादी पक्ष को दो दिन का समय देते हुए सुनवाई की अगली तिथि सात फरवरी नियत कर दी है। 

यह था मामला
पारस सोम पर युवती रूबी का अपहरण करने और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से प्रहार कर हत्या करने का आरोप है। वर्तमान में पारस जेल में बंद है। पारस के परिजनों ने अधिवक्ताओं के पैनल के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पारस के नाबालिग होने का दावा किया था। इस प्रार्थना पत्र की सुनवाई एससी एसटी एक्ट न्यायालय एडीजे मोहम्मद असलम सिद्दीकी की अदालत में चल रही है।
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शनिवार को साक्ष्य नहीं दे पाए थे
इससे पहले शनिवार को हुई सुनवाई में वादी रूबी पक्ष ने न्यायालय में तर्क दिया था कि आरोपी की उम्र की जांच के लिए उसका पांचवीं कक्षा का रिकॉर्ड तलब किया जाना चाहिए। पारस के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया था।

उन्होंने कहा था कि जन्मतिथि का निर्धारण दसवीं कक्षा की मार्कशीट के आधार पर होना चाहिए। इसके बाद वादी के अधिवक्ता ने पांचवीं कक्षा से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड तलब करने के लिए विधि व्याख्या देने हेतु समय मांगा था।

हालांकि मंगलवार को हुई सुनवाई में वादी अधिवक्ता द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश के लिए पत्रावली आरक्षित कर ली थी।
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