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बंगला नंबर 210बी के मालिक की अर्जी शीर्ष कोर्ट में खारिज

Wed, 27 Apr 2016 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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  जिसके बाद हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा उनके खिलाफ छह माह की सजा का सुनाया
 फैसला अब मान्य होगा। वहीं, आदेश आते ही बंगला नंबर 210 बी भी जल्द ध्वस्त किया जाएगा।बंगला नंबर 210 बी में 14 दुकानों के निर्माण को अवैध ठहराते हुए कैंट बोर्ड ने 1994 में ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ पुष्पा देवी और अन्य सीनियर डिविजन कोर्ट में चले गए थे।
यहां से उन्हें स्टे मिल गया था। बोर्ड ने नए निर्माण के सुबूत पेश किए तो कोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया। इसके खिलाफ बिल्डर आनंद प्र्रकाश ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 13 अप्रैल 1995 को बिल्डर को नया निर्माण नहीं करने और कैंट बोर्ड को ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं करने को कहा था। 
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आदेश के बाद भी यहां नए निर्माण होते रहे। देखते ही देखते 62 कोठियां
24 दुकानें और आरआर मॉल समेत दो कॉमर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण हो गया। इस पर कैंट बोर्ड ने वर्ष 2000 में अवमानना वाद दायर कर दिया था। कोर्ट ने वर्ष 2008 में एडवोकेट कमीशन भेजा और उसकी रिपोर्ट पर 29 जनवरी 2014 को कोर्ट की एकल पीठ ने अवमानना की पुष्टि करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए। साथ ही बिल्डर को 6 महीने की सजा सुनाई। इसके खिलाफ बिल्डर ने डबल बेंच में अपील की थी। 

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने भी गत 1 मार्च को बिल्डर आनंद प्र्रकाश
आदि की अपील को खारिज कर दिया था। इसके बाद बिल्डर सुप्रीम कोर्ट चले गए। मंगलवार को सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में कैंट बोर्ड की वकील रेखा पांडे ने फोन पर उन्हें बताया है कि बंगला नंबर 210 बी के मालिक बिल्डर आनंद प्रकाश अग्रवाल की अपील सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई है। उनके अनुसार, हाईकोर्ट की एकल पीठ का फैसला ही मान्य होगा। जिसमें बिल्डर को छह माह की सजा सुनाई गई थी।  

एडवोकेट कमीशन ने किया था निरीक्षण
हाईकोर्ट में कैंट बोर्ड ने नए निर्माण होने की अवमानना याचिका दायर की थी। इस पर आनंद प्रकाश अग्रवाल आदि ने नए निर्माण के बारे में मना करते हुए मरम्मत कराने की बात कही थी। मामले के बीच में ही पुष्पा देवी ने अवैध रूप से एक वसीयत आनंद प्रकाश की पत्नी मीनू अग्रवाल के नाम कर दी थी।
इस तथ्य को हाईकोर्ट से छिपाया गया था। कोर्ट में लोगों ने तर्क दिया था कि यह जमीन फ्री होल्ड है, इसलिए बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण हो सकता है। लेकिन हाईकोर्ट ने इनकी बात को नहीं मानते हुए 2008 में एडवोकेट कमीशन को मौका मुआयना करने के लिए भेजा था।
मुआयने के बाद कमीशन ने कोर्ट को रिपोर्ट दी कि बंगला रेजिडेंशियल है और आसपास 96 कोठियां, 24 दुकानें, दो कॉमर्शियल कांप्लेक्स और एक मॉल बनाए गए हैं, जो नए हैं। 
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850 करोड़ से ज्यादा है मार्केट रेट
52 हजार वर्ग मीटर में बने 210 बी का मार्केट रेट करीब 850 करोड़ रुपये हैं। डीएम सर्किल रेट 72 हजार 500 के हिसाब से जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ रुपये बैठती है। इसके अलावा यहां बनी 62 कोठियां, 24 दुकानें, दो कांप्लेक्स और एक मॉल को शामिल कर लें तो यह कीमत 850 करोड़ तक पहुंच सकती है।
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