योगेश वर्मा ने कहा कि यह लड़ाई विचारधारा की है। भाजपा सरकार उसी लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी ने बोर्ड बैठक में हुई घटना की वीडियो में देखा है, जिसमें भाजपा सरकार के मंत्री और एमएलसी दलित विधायकों की पिटाई कर रहे हैं। इसके बावजूद सत्ता के नशे में चूर भाजपा के नेताओं ने तहरीर देने के बाद भी मामला अज्ञात में दर्ज करा दिया।
पूर्व विधायक विनोद हरित ने कहा कि अगर मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो बडा आंदोलन 10 जनवरी को किया जाएगा। इस दौरान मेरठ सहित गाजियाबाद, नोएडा और बागपत आदि जिलों के सपा-बसपा व अन्य पार्टी के लोग मौजूद रहे।
सपा बोले, आमरण अनशन भी करेंगे
पंचायत में कुछ सपाइयों ने आमरण अनशन करने की भी बात कही। सपा के पऱदेश अध्यक्ष द्वारा गठित 9 सदस्य समिति के सदस्य रविंदऱ पऱेमी ने कहा कि आमरण अनशन भी किया जाएगा। अतुल पऱधान ने कहा कि इंसाफ नहीं मिला तो आमरण अनशन की भी तैयारी है। हालांकि योगेश वर्मा का कहना था कि सिर्फ विरोध प्रदर्शन किया।
नगर निगम ने झाडा पल्ला, जांच से खड़े किए हाथ
नगर निगम की बोर्ड बैठक के दौरान हुए बवाल के मामले में नगर आयुक्त ने जांच से हाथ खडे़ कर दिए। नगरा आयुक्त डॉ अमित पाल शर्मा ने इस संबंध में महापौर को पत्र भेज दिया है। महापौर का कहना है कि वो अब खुद जांच समिति गठित कर जांच कराएंगे।
पांच दिनों से नगर निगम के बवाल की जांच का सभी को इंतजार था, मगर बुधवार को नगर निगम ने इसकी जांच करने से इंकार कर दिया। शनिवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों और भाजपाईयों में मारपीट की घटना हुई थी। राज्यमंत्री और एमएलसी पर मारपीट का आरोप है। इसकी वीडियो भी वायरल हुई। महापौर ने इसकी जांच के निर्देश नगरायुक्त को दिए थे। नगरायुक्त को दो दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया था। सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर लगी थीं, मगर जांच हुई ही नहीं।
बुधवार देर शाम को नगरायुक्त डॉ अमित पाल शर्मा ने महापौर को भेजे पत्र में नगर निगम अधिनियम का हवाला देते हुए बताया कि सदन में हुई किसी भी घटना की जांच कराने का अधिकार सभापति यानि महापौर को है। इसलिए नगर निगम इस मामले की जांच नहीं करा सकता। उधर, महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि नगर आयुक्त का पत्र मिला है। अब वो बृहस्पतिवार को इस मामले की जांच के लिए पांच पार्षदों और दो अधिकारियों की जांच समिति गठित करेंगे।