अमर उजाला....बिजली बंबा बायपास की रोड लाइट ना जलने की वजह से छाया है अंधेरा |
महानगर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था बदहाल हो चुकी है, जिससे मुख्य मार्गों और कॉलोनियों में अंधेरा छा जाता है। यह स्थिति लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रस्तावित मेरठ दौरे के बावजूद नगर निगम लाइटें दुरुस्त करने में नाकाम रहा है, जिससे पार्षदों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, महानगर में करीब 96 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। इनकी देखरेख और मरम्मत के लिए हर साल करीब पांच करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। इसके बावजूद शहर की लगभग 70 फीसदी लाइटें बंद बताई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे के कारण चोरी, लूट और सड़क दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। कई कॉलोनियों में महिलाएं और बुजुर्ग रात में निकलने से डरते हैं। पार्षदों ने निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वार्ड-60 की भाजपा पार्षद रेखा सिंह ने करीब 10 फरवरी 2026 को क्षेत्रीय लोगों के साथ निगम में हंगामा किया था। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
विपक्ष का हंगामा
एआईएमएमआई के पार्षद फजल करीम, रिजवान अंसारी सहित कई विपक्षी पार्षदों ने शुक्रवार सुबह नगर निगम में हंगामा किया। उन्होंने रमजान महीने में स्ट्रीट लाइटें जलाने और सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग की। पार्षदों का कहना है कि बजट खर्च होने के बावजूद शहर अंधेरे में डूबा है, जो निगम की लापरवाही दर्शाता है। उन्होंने महापौर और नगर आयुक्त को ज्ञापन देने की बात भी कही है।
निगम का पक्ष
पथ प्रकाश प्रभारी एवं मुख्य अभियंता (निर्माण) पीके सिसोदिया ने बताया कि जहां-जहां पार्षदों ने मांग की है, वहां प्राथमिकता से लाइटें लगाई जा रही हैं। उनके अनुसार, निगम की टीमें रोज शहर में निकलकर शिकायतों के आधार पर लाइटें ठीक कराने का अभियान चला रही हैं। सिसोदिया ने दावा किया कि पहले से काफी सुधार हुआ है।