मेरठ मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती 50 वर्षीय फिरदौस दिल की मरीज थीं। परेशानी ये थी कि मेडिकल में दिल के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। डॉक्टरों ने परिवारवालों को केजीएमयू लखनऊ ले जाने के लिए कहा, लेकिन परिजन ले नहीं जा सके। परिवार वालों ने दिल्ली एम्स ले जाने की कोशिश की, मगर वहां बात नहीं बन सकी। रात साढ़े दस बजे ।
अंजुम पैलेस के पास श्याम नगर निवासी फिरदौस हापुड़ अड्डा स्थित युग हॉस्पिटल में भर्ती थीं। शुक्रवार को कोरोना की पुष्टि के बाद मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों का कहना है कि फिरदौस का 20 प्रतिशत दिल कार्य कर रहा था। शुक्रवार को देर रात उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था।
मेडिकल कॉलेज में अब तक 18 मरीज वेंटीलेटर पर पहुंचे हैं, इनमें से अधिकांश की मौत हो गई। प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग का कहना है कि अस्पताल में वेंटीलेटर और डायलिसिस यूनिट समेत अन्य बीमारियों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
इन मरीजों को ठीक करने के मेडिकल अस्पताल के डाक्टर रात दिन बेहतर इलाज करने में लगे है। मरीजों का हर संभव इलाज कर बचाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन फरदौस को बचाया नहीं जा सका। वह जब अस्पताल आईं थी गंभीर हालत में थी।
हायर सेंटर में नहीं मिल पा रही जगह
मेडिकल अस्पताल से मरीजों को रेफर किया जाता है, लेकिन हायर सेंटर में जगह नहीं मिल पा रही है। इमरान को भी बड़ी मुश्किल से भर्ती किया गया था। इसकी वजह यह है कि हर अस्पताल में कोविड के मरीजों को लेकर सतर्कता के साथ इनको भर्ती करने के बेड उपलब्ध नहीं है। मेडिकल में दिल के स्पेशलिस्ट डाक्टर न होने की वजह से एमडी मेडिसिन इलाज कर रहे हैं।