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Meerut News: दिमाग, दिल और पेट की बीमारी की वजह भी हो सकती है खांसी

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मेरठ। अपोलो अस्पताल दिल्ली के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश चावला ने बताया कि क्रॉनिक खांसी को सामान्य तौर पर यह समझा जाता है कि यह गले या फेफड़े के संक्रमण की वजह से है, लेकिन सिर्फ ऐसा नहीं है। यह आपके दिमाग, दिल और पेट के रोग के कारण भी हो सकती है। पुरानी खांसी दिल के दौरे का भी संकेत हो सकती है।
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डॉ. चावला रविवार को बाउंड्री रोड स्थित होटल में हुई चिकित्सकों की विभिन्न रोगों से संबंधित वैज्ञानिक गोष्ठी में अपने अनुभव साझा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर खांसी ठीक नहीं हो रही तो गले और फेफड़ों की जांच के अलावा अन्य अंगों से जुड़ीं बीमारियों की जांच भी करा लेनी चाहिए, वह भी वजह हो सकती हैं। इनके अलावा वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल, पेट एवं लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यार्थ चौधरी और गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार ने भी व्याख्यान दिए।
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एलडीएल का निम्न स्तर रखें तो हार्टअटैक से बचे रहेंगे : डॉ. राजीव अग्रवाल
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि एथेरोस्क्लेरोसिस बीमारी में प्लाक धमनियों के अंदर जम जाता है और सख्त हो जाता है। यह हृदय संबंधी बीमारियों का प्रमुख कारण है। पुराना विश्वास यह था कि यह बीमारी बढ़ती ही रहती है, लेकिन अब यह बात पता चली है कि अगर खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) लेवल को न्यूनतम स्तर 10-15 पर रखा जाए तो मरीजों में इस बीमारी रिवर्स भी की जा सकता है। इसके लिए संबंधित दवाएं ले सकते हैं। खानपान बेहतर कर, सही नींद लेकर, व्यायाम करके, वजन कम करके, मानसिक स्वास्थ्य ठीक करके और कोलेस्ट्रॉल, शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करके एलडीएल का स्तर कम कर सकते हैं।
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हड्डी का कैंसर गुर्दे कर रहा खराब : डॉ. प्रदीप कुमार
वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि हड्डी का कैंसर (मल्टीपल माइलोमा) लोगों के गुर्दे खराब कर रहा है। यह बीमारी कैल्शियम गलाती है, जो गुर्दे में चला जाता है। अगर गुर्दे पर असर पड़ने से पहले इस बीमारी को नियंत्रित कर लिया जाए तो गुर्दे बचाए जा सकते हैं। गुर्दे खराब होने की सबसे बड़ी वजह डायबिटीज सामने आ रही है। गुर्दों के खराब होने के ज्यादातर मरीज डायबिटीज वाले होते हैं। इसकी वजह गलत खानपान है।
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दवाओं से भी हो सकता है डायरिया : डॉ. सत्यार्थ चौधरी
वरिष्ठ पेट एवं लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यार्थ चौधरी ने बताया कि डायरिया कई तरह की दवाओं से भी हो सकता है। जैसे- शुगर आदि में दी जानी वाली दवाएं मेटफॉर्मिन आदि। सामान्य डायरिया आसानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ गंभीर डायरिया होते हैं, जिसके लिए जांच जरूरी है कि वह क्यों हुआ है। डायरिया कई तरह के होते हैं, जैसे-एक्यूट डायरिया, पर्सिस्टेंट डायरिया और क्रॉनिक डायरिया। सभी के अलग-अलग कारण और इलाज होते हैं। खासकर क्रॉनिक डायरिया चार सप्ताह से ज्यादा समय तक रह सकता है और यह ठीक होने के बाद भी वापस आ सकता है।
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डॉ. संदीप जैन बने अध्यक्ष, डॉ. शुभम जैन सचिव

- चिकित्सकों की संस्था पीआईसीई फाउंडेशन का हुआ अधिष्ठापन समारोह

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। चिकित्सकों की संस्था एकेडमी ऑफ पल्मोनरी इंटरनेशनल एंड इमरजेंसी मेडिसिन क्रिटिकल केयर (पीआईसीई) फाउंडेशन की मेरठ शाखा का अधिष्ठापन समारोह रविवार को बाउंड्री रोड स्थित एक होटल में किया गया। डॉ. संदीप जैन संस्था के अध्यक्ष चुने गए। इनके अलावा डॉ. शुभम जैन सचिव और डॉ. अजय गोयल वित्त सचिव बने। विशेष सदस्यों में डॉ. शिशिर जैन, डॉ. नीरज गोयल, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. आयुष जैन, डॉ. मनीष जैन, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. अर्चना गोयल, डॉ. शांतनु अग्रवाल और डॉ. विकास गुप्ता सहित अन्य ने शपथ ली।
डॉ. संदीप जैन ने कहा कि यह संस्था हर माह सामान्य चिकित्सकों के लिए सामान्य विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दिलाएगी। इससे मरीजों को आधुनिक और जल्द उपचार मिलने में लाभ मिलेगा। यह एक राष्ट्रीय पंजीकृत अकादमिक संस्था है। इससे पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अधीप मित्रा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. आरसी गुप्ता, डॉ. प्रदीप भारती और डॉ. राहुल मित्तल आदि ने की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय विशेष सलाहकार डॉ. शरद अग्रवाल, राष्ट्रीय निदेशक डॉ. आशीष अग्रवाल, डॉ. विश्व बंधु जिंदल और डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल आदि रहे।
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