प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह का कहना कि उक्त गाड़ियों में से 20 गाड़ी कंकरखेड़ा डिपो और 12 गाड़ी दिल्ली डिपो में मिली है। उनके कार्य की रिपोर्ट दोनों डिपो प्रभारी से ली जा रही है।
28 गाड़ी कहां पर है, इसकी अभी जांच चल रही है। अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय का कहना है कि नगर आयुक्त का पत्र मिल गया है। मंगलवार को कमेटी इसकी जांच शुरू करेगी।
एसबीएम पर महापौर ने भी उठाए सवाल
नगर निगम परिसर में एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) की सेल है। जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजर के अलावा दस कर्मचारी की नियुक्ति अस्थायी है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने रविवार को एसबीएम को नोटिस भेजा था।
सोमवार को महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने भी एसबीएम की कार्यशैली पर सवाल उठाए। महापौर ने कहा कि कूड़ा गाड़ी हो या फिर कई काम की लिस्ट एसबीएम ही बनाता है। एसबीएम के कर्मचारी हमें भी जवाब नहीं देते। निगम में एसबीएम का कोई कार्य दिखाई नहीं देता है। जिन्होंने कूड़ा गाड़ी के मामले में एसबीएम को जिम्मेदार बताया है।
यह भी पढ़ें: कसा शिकंजा: रफीक अंसारी ने पार्षद से शुरू किया था राजनीतिक सफर, दो बार बने विधायक, रह चुके हैं हिस्ट्रीशीटर
भुगतान हुआ, अब बचाव में जुटे अधिकारी
नगर निगम के अधिकारी दिनभर कूड़ा गाड़ी के मामले में लीपापोती करने में जुटे रहे। गाड़ियों के कागज को लेकर अलग-अलग लिस्ट बनाई गई। प्राथमिक जांच में
सामने आया कि निगम से इन सभी गाड़ियों का भुगतान हुआ है।
गाड़ियां निजी लोगों की है, उनका पता लगाया जा रहा है। हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कागजों में चल रही कूड़ा गाड़ियों का भुगतान हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी लेखा विभाग से भी ली गई। अधिकारियों ने जांच कमेटी को सारी जानकारी देना बताया है।