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भ्रष्टाचार का खेल: 43 से 60 हुई गायब हुई गाड़ियों की संख्या, भुगतान हुआ, अब बचाव में जुटे अधिकारी

Tue, 28 May 2024 11:56 AM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चाैधरी, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों के गायब होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एनजीटी कोर्ट में 24 मई सुनवाई के दौरान नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने में 188 गाड़ी की सूची प्रस्तुत की। इनमें कुल 60 गाड़ियों गायब मिली हैं।
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मेरठ में कूड़े का पहाड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में कितना भ्रष्टाचार हुआ है, इसकी जांच नगर निगम ने शुरू कर दी है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने सोमवार सुबह बीवीजी कंपनी, डिपो प्रभारी, एसबीएम कार्यालय से गाड़ियों की सूची की पड़ताल की। गायब होने वाली गाड़ियों की संख्या 43 से 60 पहुंच गई है।

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प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी, डिपो प्रभारी और बीवीजी कंपनी से स्पष्टीकरण लेने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर आयुक्त द्वारा जारी पत्र जांच कमेटी में शामिल अधिकारी अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय, एमएनएलपी अमित भार्गव को सोमवार शाम 5 बजे रिसीव हो गया है। 

एनजीटी कोर्ट में 24 मई सुनवाई के दौरान नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने में 188 गाड़ी की सूची प्रस्तुत की। सुबह व दोपहर को कहां, कितना कूड़ा उठाती है, इसका विवरण भी दिया था। इन गाड़ियों में 43 ऐसी गाड़ी थी, जोकि सिर्फ कागजों में कूड़ा उठा रही है। इसकी पोल अमर उजाला ने खोली। नगर आयुक्त ने रविवार को  जांच कमेटी गठित कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को प्रभारी नगर स्वास्थ्य ने इसकी जांच की, जिसमें 43 की जगह गाड़ियों की संख्या 60 पहुंच गई। 
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प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह का कहना कि उक्त गाड़ियों में से 20 गाड़ी कंकरखेड़ा डिपो और 12 गाड़ी दिल्ली डिपो में मिली है। उनके कार्य की रिपोर्ट दोनों डिपो प्रभारी से ली जा रही है। 

28 गाड़ी कहां पर है, इसकी अभी जांच चल रही है। अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय का कहना है कि नगर आयुक्त का पत्र मिल गया है। मंगलवार को कमेटी इसकी जांच शुरू करेगी। 
 

एसबीएम पर महापौर ने भी उठाए सवाल 
नगर निगम परिसर में एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) की सेल है। जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजर के अलावा दस कर्मचारी की नियुक्ति अस्थायी है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने रविवार को एसबीएम को नोटिस भेजा था।

सोमवार को महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने भी एसबीएम की कार्यशैली पर सवाल उठाए। महापौर ने कहा कि कूड़ा गाड़ी हो या फिर कई काम की लिस्ट एसबीएम ही बनाता है। एसबीएम के कर्मचारी हमें भी जवाब नहीं देते। निगम में एसबीएम का कोई कार्य दिखाई नहीं देता है। जिन्होंने कूड़ा गाड़ी के मामले में एसबीएम को जिम्मेदार बताया है। 

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भुगतान हुआ, अब बचाव में जुटे अधिकारी 
नगर निगम के अधिकारी दिनभर कूड़ा गाड़ी के मामले में लीपापोती करने में जुटे रहे। गाड़ियों के कागज को लेकर अलग-अलग लिस्ट बनाई गई। प्राथमिक जांच में 
सामने आया कि निगम से इन सभी गाड़ियों का भुगतान हुआ है।

गाड़ियां निजी लोगों की है, उनका पता लगाया जा रहा है। हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कागजों में चल रही कूड़ा गाड़ियों का भुगतान हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी लेखा विभाग से भी ली गई। अधिकारियों ने जांच कमेटी को सारी जानकारी देना बताया है।
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