नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। विभागीय अधिकारियों ने होटल हारमनी के बकाया हाउस टैक्स को जमा कराने में छह लाख से ज्यादा का हेरफेर कर दिया। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने तो मामले संज्ञान में न होने की बात कही है।
अमर उजाला को महानगर की कामर्शियल संपत्तियों के कुछ हाउस टैक्स बिल और भवनों का रिकार्ड मिला है। इसमें गढ़ रोड स्थित होटल हारमनी पर निगम के हाउस टैक्स और भवन के वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट से भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है। निगम के रिकार्ड के मुताबिक 2017-18 तक होटल हारमनी के मालिक ताराचंद पुरी थे। इनके नाम से ही नगर निगम हाउस टैक्स वसूलता था। 2018 में जैसे ही होटल मालिक के विदेश भागने की सूचना आई तो नगर निगम ने होटल पर हाउस टैक्स 13,86,340 रुपये का नोटिस चस्पा कर दिया था।
निगम खजाने तक पहुंचे 7,41,525.89 रुपये
नगर निगम द्वारा होटल पर बकाया हाउस टैक्स 13,86,340 रुपये का नोटिस चस्पा किया गया था। यह धन निगम के कोष में जमा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। टैक्स विभाग के अधिकारियों ने भवन स्वामी से मिलीभगत कर 9 जनवरी 2019 को रसीद संख्या 042-1873 के अनुसार निगम खजाने में केवल 7,41,525.89 रुपये ही जमा किए हैं। अब होटल के मालिक यानी भवन स्वामी का नाम परिवर्तन कर दुर्गा हेबिटेट के मालिक अमित चांदना के नाम से 10 जून 2019 में जारी किए गए 2019-20 के हाउस टैक्स बिल में पिछला कोई बकाया भवन स्वामी पर नहीं है।
कहां गए निगम के 6,44,815 रुपये
निगम हाउस टैक्स के अधिकारियों द्वारा होटल पर 2018 में निकाले गए बकाया हाउस टैक्स और जमा कराए गए हाउस टैक्स की धनराशि से यह तो साफ है कि विभाग के अधिकारियों ने गोलमाल किया है। सीधे सीधे नगर निगम को 6 लाख 44 हजार 815 रुपये का चूना लगाया है।
भवन की एआरबी में भी खेल
हाउस टैक्स विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने फायदे और निगम को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी कर रहे हैं। इसकी बानगी इसी भवन की एआरबी में देखी जा सकती है। पीटीआई संख्या 240002753 के बिल में 2011 से 2017 और 2019 में कई बार एक ही भवन की एआरबी, वार्षिक मूल्यांकन को बदला गया है। एआरबी बदलकर ही हाउस टैक्स में सेटिंग का खेल हुआ। इससे नगर निगम को फटका लगता चला गया।
करते हैं परेशान
हाउस टैक्स विभाग द्वारा किसी भवन स्वामी को नोटिस भेजकर परेशान करना, हाउस टैक्स के बिल बढ़ाकर भेजना, मिलीभगत कर बिल के साथ भवन का आकार कम कर देने का खेल आवासीय ही नहीं बल्कि कामर्शियल भवनों पर भी किया जाता है। इससे निगम को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
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संज्ञान में नहीं है मामला
होटल हारमनी के हाउस टैक्स बिल का मामला संज्ञान में नहीं है। हो सकता है किसी कारण अथवा किसी नियम के तहत ही भवन स्वामी से कम हाउस टैक्स जमा कराया गया हो। इसे दिखवाया जाएगा। -अवधेश कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
कराई जाएगी जांच
हाउस टैक्स की शिकायतें हमारे पास भी आती हैं। यदि एक ही भवन के टैक्स में निगम को कई लाख का नुकसान पहुंचाया गया है तो जांच कराई जाएगी। संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। -अमित सिंह, अपर नगरायुक्त।