बाहरी राज्यों के मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश के ही बुल्ली कहते हैं कि यहां की जनता ने हमें भूखे नहीं मरने दिया। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। हमारे बच्चों को बिस्कुट भी दिए हैं। हम गांव लौटना चाहते हैं।
मध्यप्रदेश की सीताबाई कहती हैं कि हमारे पास यहां न तो कोई रोजगार है और न ही आमदनी का कोई साधन है। अपने घर से आए बहुत दिन हो गए। अब घर की याद आ रही है। सरकार को हमारी सुननी चाहिए।
छत्तीसगढ़ के सिमरेगा के रहने वाले पप्पू कहते हैं कि हम लोग रेलवे के ठेकेदार के यहां मजदूरी करते हुए गाजियाबाद से यहां आ गए थे। लॉकडाउन में ऐेसे फंसे की रोटी के लिए भी दूसरों पर मोहताज हो गए हैं। यहां हमें रोटी मिल रही है, हम दूसरों पर कब तक बोझ रहें, हमें हमारे घर भिजवा दो।
बाहर से आकर बगैर सूचना दिए घरों में रहना चिंताजनक
पिछले तीन दिनों से बाहरी क्षेत्रों से कस्बे में आने वाले लोगों का सिलसिला जारी है, जिनमें से अधिकांश लोगों द्वारा पुलिस को सूचना दिए बिना बगैर जांच कराए अपने घरों में घुस जाना कस्बे के लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
कस्बा निवासी सैकड़ों लोग नेपाल बॉर्डर व बहराइच और कानपुर, मध्य प्रदेश आदि जगहों पर गन्ने के कोल्हुओं में काम करते हैं। लॉकडाउन के चलते वह लोग वहीं पर फंसे हुए थे। करीब 40 लोग सोमवार की रात पुरकाजी आए थे, जिनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद प्रशासन द्वारा मंगलवार को राजकीय इंटर कॉलेज पुरकाजी देहात में होम क्वारंटीन कर दिया गया था, जिनमें चार लोग बिना बताए अपने घरों में घुस गए थे। जानकारी मिलने पर पुलिस ने बुधवार को उन्हें भी वहीं पर होम क्वारंटीन कर दिया था। बुधवार को नेपाल बॉर्डर से पुरकाजी आए एक दर्जन लोग चुपचाप पुलिस प्रशासन को सूचना दिए बिना अपने घरों में घुस गए, जिससे मोहल्लेवासियों में दहशत बनी हुई है।
उधर, चेयरमैन जहीर फारूकी ने सोशल मीडिया पर मैसेज जारी करते हुए कहा कि बाहर से आए कुछ लोग अपनी सेटिंग कर घरों में पहुंच गए है, जो परिजनों और कस्बेवासियों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।
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