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बड़ा सवाल: पश्चिमी यूपी में क्या पीक पर पहुंच रहा कोरोना, आरटीपीसीआर जांच में 42 फीसदी पहुंची संक्रमण दर

Fri, 30 Apr 2021 12:29 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

पश्चिमी यूपी के शहरी क्षेत्रों में क्या कोरोना संक्रमण पीक की तरफ पहुंच रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि गुरुवार को आई आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में 42 फीसदी सैंपल कोरोना पॉजिटिव निकले हैं।
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कोरोना जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमी यूपी के शहरी क्षेत्रों में क्या कोरोना संक्रमण पीक की तरफ पहुंच रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि गुरुवार को आई आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में 42 फीसदी सैंपल कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। एंटीजन जांच में सिर्फ सात फीसदी ही संक्रमित मिले हैं। मेरठ मंडल में कुल संक्रमण दर बीस फीसदी है। अभी कोरोना संक्रमण के ज्यादा मामले शहरी क्षेत्रों के हैं, ग्रामीण इलाकों में अभी संक्रमण बढ़ने का अंदेशा बना हुआ है। 

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मेरठ मंडल में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए गए सैंपल की एंटीजन जांच ज्यादा हो रही है। आरटीपीसीआर जांच अपेक्षाकृत कम हैं। गुरुवार को हापुड़ और गाजियाबाद में संक्रमण दर सर्वाधिक रही। मेरठ में आरटीपीसीआर जांच में 36 फीसदी सैंपल कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। एंटीजन जांच में सिर्फ छह फीसदी कोरोना संक्रमित आए हैं। मेरठ के मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ने आरटीपीसीआर जांच में 42 फीसदी संक्रमण दर की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह कोरोना संक्रमण के सर्वोच्च स्तर पर होने की निशानी हो सकता है। यूं भी प्रदेश में संक्रमण दर में मामूली गिरावट आई है। 

मंडल में 154, मेरठ में सात डॉक्टर संक्रमित
मंडलायुक्त ने बताया कि मंडल के छह जिलों में 7091 बेड ऑक्सीजन आपूर्ति वाले हैं। इनमें से 1990 बेड मेरठ के हैं। मेरठ में आईसीयू में 611 बेड की उपलब्धता है और कुल 175 वेंटिलेटर की सुविधा है। 17 हजार 544 लोग होम आइसोलेशन में हैं। इनमें 5790 लोग मेरठ जिले के हैं। होम आइसोलेशन वाले 99 फीसदी मरीजों को मेडिसिन किट दे दी गई है। उन्होंने माना कि कांटेक्ट ट्रेसिंग ज्यादा नहीं हो पा रही है। मंडल में 154 डॉक्टर कोरोना संक्रमित हैं, इनमें सबसे कम सात डॉक्टर मेरठ में संक्रमित है, जबकि बागपत में 45, बुलंदशहर में 47 और गाजियाबाद में 46 डॉक्टर संक्रमण की चपेट में हैं। 
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मरीजों से सिलिंडर मंगाए तो कम होंगे अस्पतालों के कोविड बेड
मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ने माना कि ऑक्सीजन के चारों री-फीलिंग सेंटर पर देर रात तक भीड़ जमा हो रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि डॉक्टर मरीजों से कह रहे हैं कि वह अपना सिलिंडर लेकर आए, बेड मिल जाएगा। जो अस्पताल मरीजों से सिलिंडर मंगाएंगे, उनके कोविड बेड कम किए जाएंगे। यह माना जाएगा कि उनका प्रबंधन उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि मेरठ में तीन दिन के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता है। 

मेरठ मंडल में कुल 3291 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। मेरठ जिले में 452 कंटेनमेंट जोन हैं। इनमें शनिवार से सख्ती बढ़ाई जाएगी। मंडलायुक्त ने इस संबंध में सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत चुनाव समाप्त हो जाने के बाद फोर्स की उपलब्धता बढ़ गई है।
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