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यूपी: हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं... फिर भी नहीं किया भर्ती, भकटते रहे परिजन, सामने आए ये चार बड़े मामले

Sat, 24 Apr 2021 03:49 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

कोरोना तो छोड़िए, अन्य रोगियों को भी अब आसानी से इलाज नहीं मिल रहा है। जरूरतमंद रोगी को किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन वाला बेड नहीं मिल रहा है।
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अस्पताल में भर्ती कराने के लिए हाथ जोड़ते परिजन। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना तो छोड़िए, अन्य रोगियों को भी अब आसानी से इलाज नहीं मिल रहा है। जरूरतमंद रोगी को किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन वाला बेड नहीं मिल रहा है। परिजन अस्पतालों के बाहर मिन्नतें कर रहे हैं। अस्पताल कर्मचारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहे हैं कि उनके अपनों को बचा लें, लेकिन किसी की नहीं सुनी जा रही है। मेडिकल अफसर ऑक्सीजन पर्याप्त होने का दावा कर रहे हैं, वहीं गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन की कमी बताकर लौटाया जा रहा है। 

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मेडिकल में शुक्रवार दोपहर कंकरखेड़ा से परिजन महिला को एंबुलेंस में लेकर इमरजेंसी पहुंचे। महिला को फेफड़ों में संक्रमण था। परिजनों ने इमरजेंसी में भर्ती के लिए कहा तो कर्मचारियों ने इनकार कर दिया। आधे घंटे तक परिजन मिन्नतें करते रहे, बेड नहीं मिला। निराश परिजन महिला को लेकर चले गए। 

केस - 1
हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं, फिर भी नहीं किया भर्ती 

मुजफ्फरनगर जाट कॉलोनी निवासी रिषभ की बुआ के फेफड़ों में संक्रमण से हालत बिगड़ गई। परिवार वाले मेरठ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। परिजनों ने बताया कि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है। फेफड़ों में संक्रमण है। भर्ती कर लीजिए। कर्मचारियों ने कहा ये गंभीर हैं। इनके लिए बेड नहीं है। रिषभ हाथ जोड़ते रहे, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। घंटों दूसरे अस्पतालों में भटकने के बाद एक निजी अस्पताल में बेड मिला।
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केस - 2
रेमडेसिविर के लिए भटक रहे 

दिल्ली के सुशील अग्रवाल को कोरोना संक्रमण होने पर दिल्ली और गाजियाबाद में कहीं भी बेड नहीं मिला। किसी के बताने पर परिजन मेरठ आ गए। यहां पर संतोष अस्पताल में भर्ती करा दिया। सुबह से रात तक सुशील की बेटी मेडिकल स्टोर के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला।

केस - 3
कोविड कंट्रोल रूम पर सिर्फ फोन सुन रहे 

दिल्ली की एक महिला कई दिन से कोरोना संक्रमण होने के बाद हापुड़ रोड स्थित अस्पताल में भर्ती है। गुरुवार को अस्पताल के कर्मचारियों ने ऑक्सीजन की कमी बताते हुए दूसरी जगह इंतजाम करने को कहा। परिजनों ने कोविड कंट्रोल रूम के नंबर 01212668470 पर फोन कर मेडिकल में भर्ती कराने की गुहार लगाई तो वहां से जवाब मिला कि दिखवा रहे हैं। युवती के फोन पर कोई जवाब नहीं आया। गनीमत रही कि अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंच गई।

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केस - 4
ऑक्सीजन की कमी से गई जान

दिल्ली निवासी मुकेश कश्यप ने बताया कि वह अपने रिश्तेदार खुर्जा निवासी खेमचंद को लेकर पहले बुलंदशहर पहुंचे। यहां डाक्टरों ने जवाब दे दिया। एंबुलेंस में खेमचंद को लेकर नोएडा के कई अस्पतालों के चक्कर लगाए गए। अंत में खेमचंद को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। लेकिन उसकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने सूरजकुंड श्मशान में अंतिम संस्कार किया।

पिता को बचाने के लिए भटकता रहा बेटा
पिता को अस्थमा का दौरा पड़ने पर उसे बचाने के लिए बेटा एक से दूसरे अस्पताल में चक्कर काटता रहा। कोविड रिपोर्ट न होने की बात कहकर अस्पताल प्रबंधन ने प्राथमिक चिकित्सा देने से भी इनकार कर दिया। परिजन अस्पताल प्रबंधक के सामने मदद की गुहार लगाते रहे। चार घंटे तक चिकित्सा सुविधा मुहैया न होने के कारण पिता की मृत्यु हो गई। सूरजकुंड श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। शहर में यह पहला मामला नहीं जब चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी की जान गई है। हर दिन ऐसे मामले आ रहे हैं। 

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सदर काली बाड़ी निवासी विजय कुमार बैनर्जी की समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने पर जान चली गई। विजय के मित्र माणिक और उसके पुत्र मोनू ने बताया कि विजय को अस्थमा संबंधी समस्या थी। काफी समय से उसका इलाज चल रहा था। गुरुवार रात दस बजे उसे अस्थमा का अटैक आया। परिजन उसे छिपी टैंक स्थित अस्पताल में ले गए। कई डाक्टरों से फोन पर संपर्क किया गया कि पीड़ित विजय को प्राथमिक चिकित्सा मिल जाए। अस्पताल प्रबंधन ने कोविड रिपोर्ट का हवाला देते हुए उसे भर्ती तक करने से इनकार कर दिया। कुछ ही देर बाद विजय ने दम तोड़ दिया।
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