केस - 4
ऑक्सीजन की कमी से गई जान
दिल्ली निवासी मुकेश कश्यप ने बताया कि वह अपने रिश्तेदार खुर्जा निवासी खेमचंद को लेकर पहले बुलंदशहर पहुंचे। यहां डाक्टरों ने जवाब दे दिया। एंबुलेंस में खेमचंद को लेकर नोएडा के कई अस्पतालों के चक्कर लगाए गए। अंत में खेमचंद को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। लेकिन उसकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने सूरजकुंड श्मशान में अंतिम संस्कार किया।
पिता को बचाने के लिए भटकता रहा बेटा
पिता को अस्थमा का दौरा पड़ने पर उसे बचाने के लिए बेटा एक से दूसरे अस्पताल में चक्कर काटता रहा। कोविड रिपोर्ट न होने की बात कहकर अस्पताल प्रबंधन ने प्राथमिक चिकित्सा देने से भी इनकार कर दिया। परिजन अस्पताल प्रबंधक के सामने मदद की गुहार लगाते रहे। चार घंटे तक चिकित्सा सुविधा मुहैया न होने के कारण पिता की मृत्यु हो गई। सूरजकुंड श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। शहर में यह पहला मामला नहीं जब चिकित्सा सुविधा के अभाव में किसी की जान गई है। हर दिन ऐसे मामले आ रहे हैं।
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सदर काली बाड़ी निवासी विजय कुमार बैनर्जी की समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने पर जान चली गई। विजय के मित्र माणिक और उसके पुत्र मोनू ने बताया कि विजय को अस्थमा संबंधी समस्या थी। काफी समय से उसका इलाज चल रहा था। गुरुवार रात दस बजे उसे अस्थमा का अटैक आया। परिजन उसे छिपी टैंक स्थित अस्पताल में ले गए। कई डाक्टरों से फोन पर संपर्क किया गया कि पीड़ित विजय को प्राथमिक चिकित्सा मिल जाए। अस्पताल प्रबंधन ने कोविड रिपोर्ट का हवाला देते हुए उसे भर्ती तक करने से इनकार कर दिया। कुछ ही देर बाद विजय ने दम तोड़ दिया।