मेरी ताकत बन गया मेरा परिवार
सरूरपुर कलां निवासी कपिल नैन जिले में सबसे पहले कोरोना पॉजिटिव मिले और सबसे पहले ही वह ठीक होकर अपने घर लौटे। कपिल का कहना है कि पूरा परिवार उनके साथ खड़ा था। इलाज के साथ-साथ परिवार का सहयोग खूब मिला। परिवार मेरी ताकत बन गया। कपिल नैन के भाई सचिन नैन कहते हैं कि बीमार से भेदभाव करना गलत है। समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। कुछ लोग बदल गए थे, कुछ लोगों ने बहुत सहयोग किया, लेकिन हमें किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है। हमारे लिए यही खुशी है कि पूरा परिवार और हमारा गांव स्वस्थ है।
हवा के झोंके की तरह बदल गई जिंदगी
रटौल गांव निवासी युवा आदिल दिल्ली से आए जमातियों के संपर्क में आने के बाद कोरोना पॉजिटिव हो गया था। आदिल का कहना है कि जैसे एक हवा का झोंका आया और जिंदगी बदल गई। पूरा परिवार अस्पताल में और आडू की फसल बर्बाद हो गई। आम के बाग पर छिड़काव नहीं हुआ। 26 अप्रैल को वह ठीक होकर घर लौटा तो आम की फसल को संभालने में जुट गया। बीमारी के हालत में उसके पिता यासीन, मां जुबैदा, छह भाई और दो बहनों ने हिम्मत बंधाई। उन्होंने कहा कि जो अच्छा सोचते हैं और अच्छा करते हैं, उन पर ऊपर वाला मेहरबानी करता है।
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