राजरानी शर्मा और महेश चंद्र अग्रवाल का फाइल फोटो।
- फोटो : amar ujala
आत्मबल और मजबूत इरादों की बदौलत बुजुर्गों ने कोरोना महामारी को मात देकर मिसाल पेश की है। साहस के सामने वृद्धावस्था भी बौनी साबित हुई। ऑक्सीजन की कमी को झेला और संक्रमण से लड़ते रहे। करीब 25 दिन में अस्पताल से डिस्चार्ज हुए। अब लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।
दृढ़ इच्छा से महामारी को दी मात
मेरठ में डिसेबल क्लब ऑफ इंडिया से जुड़ी शास्त्री नगर निवासी राजरानी शर्मा (85) विभिन्न संस्थाओं के साथ दिव्यांगों की सेवा कार्य कर रही हैं। राजरानी दो अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हो गई थी। इलाहाबाद बैंक से सेवानिवृत्त उनके बेटे ललित शर्मा ने बताया कि परिवार घबरा रहा था, लेकिन मां ने कहा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी। उन्हें जीएस मेडिकल कॉलेज हापुड़ में भर्ती किया गया, वह 22 अप्रैल को स्वस्थ हो गईं।
राजरानी शर्मा का कहना है कि अगर मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो बीमारी पर विजय पाई जा सकती है। उनकी बेटी डॉ. रेखा शर्मा सीएमओ हापुड़ हैं, तो दूसरा बेटा डॉ. प्रवीण शर्मा हापुड़ में ही एसीएमओ है। एक बेटा गाजियाबाद में आई सर्जन है।
योग शिक्षक फेफड़ों के संक्रमण से जीते
शताब्दी नगर की पंचवटी कॉलोनी निवासी महेश चंद्र अग्रवाल जिला लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय में एएओ के पद से सेवानिवृत्त हैं। वरिष्ठ नागरिक मिलन समिति शास्त्री नगर में सक्रिय हैं। वह छावनी स्थित कंपनी गार्डन में आने वाले 250 से अधिक युवाओं को योग आसन सिखा चुके हैं। पिछले दिनों वह कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती हुए और तीन दिन आईसीयू में रहे। ऑक्सीजन की कमी भी हुई, लेकिन उन्होंने आत्मबल और मजबूत इरादों से खुद को संभाला। कोविड रिपोर्ट निगेटिव आने पर वार्ड में शिफ्ट कर दिए गए। फेफड़ों में निमोनिया बताया गया, इलाज के बाद 19 मई को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
उनका कहना है कि नियमित योग और प्राणायाम से सेहत में सुधार आया है। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने वैक्सीन की पहली डोज लगवाई थी, दूसरी डोज लगवाने से एक दिन पूर्व अस्वस्थ हो गए। सही खानपान और नियमित दिनचर्या से स्वास्थ्य बेहतर रहता है।