माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कोरोना ने स्कूल से लेकर कॉलेजों तक में पढ़ाई का तरीका ही नहीं बदला, बल्कि विषय भी बदल दिए हैं। होटल मैनेजमेंट संस्थानों में अब छात्रों को इम्युनिटी बूस्टर व्यंजन बनाने की जानकारी दी जा रही है। मेहमानों के स्वागत से लेकर उनको अटैंड करने और सामाजिक दूरी के पालन की जानकारी दी जा रही है।
भीकाजी कामा सुभारती कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट के प्रिंसिपल डॉ. शिवमोहन वर्मा ने बताया कि कोरोना के बाद छात्रों को कांटेक्ट लैस हॉस्पिटेलिटी सर्विस देने का अभ्यास कराया जा रहा है। इसमें इम्युनिटी बढ़ाने वाले व्यंजनों की जानकारी, कॉफी कुकीज, गिलोय मॉकटेल्स, गुड़ की मिठाई, अदरक के मॉकटेल, राइसक्रीम बुले, अलसी पिज्जा बनाना सिखा रहे हैं। कॉन्टेक्ट लैस ऑर्डर लेना, फूड एंड बेवरेज की सर्विस की भी जानकारी दी जा रही है। हाउसकीपिंग, फ्रंट ऑफिस व कमरों में सैनिटाइजेशन भी सिखाया जा रहा है।
आईआईएमटी स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट के एचओडी निर्भर कुमार ने बताया कि अब होटल इंडस्ट्री की कार्यशैली में बड़ा बदलाव आया है। मेहमानों के स्वागत का तरीका बदल चुका है। छात्रों को कांटेक्ट लैस वर्किंग, सैनिटाइजेशन की जानकारी दे रहे हैं। मेहमानों के कॉन्टेक्ट लैस चेकइन से लेकर चेकआउट की जानकारी दे रहे हैं। केटरिंग, सर्विस के तरीके, कमरे की चाबी संभालाना, भुगतान, ऑर्डर लेना, खाना परोसना हर सर्विस को पूरी सुरक्षा के साथ करना सिखा रहे हैं।
सांई रॉयल कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट के प्रिंसिपल अंकुर गुप्ता ने बताया कि अब बदलाव के साथ ही छात्रों को तैयार कर रहे हैं। इसमें पेपर के बिना काम करना सिखा रहे हैं। कांटेक्ट लैस वर्किंग, टेबल मैनेजमेंट, खाना परोसना, सामान को रखना, उठाना, हाउस कीपिंग, रूम सर्विस के बदले तरीकों को प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल के माध्यम से सिखा रहे हैं।
कोर्स पूरा नहीं, प्री बोर्ड परीक्षा की तैयारी
मेरठ। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में कोर्स पूरा नहीं हुआ है और प्री बोर्ड की तैयारी शुरू हो गई है। स्कूलों को 10 फरवरी तक 10वीं और 12वीं का कोर्स पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। फरवरी के अंत में प्री-बोर्ड की परीक्षा कराने की तैयारी है।
जिला विद्यालय निरीक्षक गिरिजेश चौधरी ने बताया कि अधिकांश विषयों में 90 फीसदी कोर्स पूरा है। जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त कक्षाएं ली जाएंगी। इस वर्ष 30 प्रतिशत कोर्स कम कर दिया है। सबको संशोधित पाठ्यक्रम की विवरणिका भेज दी गई है। प्रधानाचार्यों ने भी स्कूल शिक्षकों को कोर्स पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। सभी स्कूलों को प्री बोर्ड परीक्षा करानी होगी, जिससे परीक्षार्थी की क्षमता का आकलन किया जा सके। अगर विद्यार्थी किसी विषय में कमजोर हैं तो शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि अतिरिक्त कक्षा लेकर परेशानी दूर करें।