कोरोना वायरस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के कारण कई तरह की परेशानियों से लोग रूबरू हो रहे हैं। एक नई परेशानी यह है कि अपनों से दूर रह रहे जिन लोगों की मृत्यु हो जा रही है उनका शव परिजनों तक कैसे पहुंचे, यह एक समस्या खड़ी हो रही है।
खेकड़ा (बागपत) की एक फैक्टरी में काम करने वाली अहाना (25) की शनिवार को मेडिकल कॉलेज मेरठ में मृत्यु हो गई। वह मूल रूप से बंगाल की रहने वाली थी। ऐसे में लॉकडाउन के कारण उसके परिजन यहां आ नहीं सकते हैं। वे परेशान हैं कि युवती का शव बंगाल कैसे पहुंचेगा। उसकी कोरोना की जांच कराई गई। रिपोर्ट निगेटिव है। इसके बावजूद तमाम तरह की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है।
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दरअसल, अब तय कर दिया गया है कि जो भी व्यक्ति गंभीर रूप से अस्पताल में आएगा और उसकी मृत्यु हो जाएगी तो उसका शव उसके परिजनों को तभी दिया जाएगा जब उसकी कोरोना की जांच हो जाएगी। कोरोना की जांच नेगेटिव आने के बावजूद अगर मामला किसी दूसरे प्रदेश से जुड़ा है तो शव को वहां तक ले जाने में परेशानी होती है। ऐसे में फैक्टरी वाले ही प्रक्रिया पूरी कर शव को बंगाल पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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