2005-06 में सिनौली साइट से दुनिया पहले ही रूबरू हो चुकी है। उस समय खुदाई के दौरान दो तांबे की तलवार, एक तांबे की म्यान, चार सोने के कंगन, एक सोने से बना मनके का हार, एक सोने की लघु मानवाकृति, सैकड़ो मनकें, 177 मानव कंकाल समेत अन्य पुरावशेष प्राप्त हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में यहां से कंकाल व पुरावशेष मिलने के बाद इस साइट को विश्व के सबसे बड़े शवाधान केन्द्र के रूप में भी पुष्ट किया जा सकता था।
विश्व की अमूल्य धरोहर है सिनौली साइट
शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने बताया कि सिनौली साइट विश्व की सबसे अमूल्य धरोहर है। शवाधान केन्द्र में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं हूबहू उसी तरह हैं, जैसी वैदिक काल में अपनाई जाती थी और इनका जिक्र ऋग्वेद, शतपथ ब्राहण ग्रंथ, गरुड़ संहिता में भी है। इन वेद, पुराण में वर्णित मंत्रों में जो प्रक्रियाएं बताई गई हैं, वे ही सिनौली शवाधान केंद्र पर अपनाई गई है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वैदिक कॉल, हड़प्पाकालीन, ताम्रयुगीन सभ्यता, संस्कृति के प्रमाण सिनौली में मौजूद है।
अन्य जनपदों से भी लोग पहुंच रहे
सिनौली उत्खनन आज देश-दुनिया की सुर्खियों में छाया है। बागपत ही नहीं अन्य जनपदों व दूरदराज से लोग यहां पर उत्खनन देखने के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि किसी बाहरी व्यक्ति को उत्खनन स्थल पर जाने की अनुमति नहीं है। फिलहाल उत्खनन अंतिम दौर में है। सिनौली उत्खनन को देखने के लिए अब घरों से महिलाएं बच्चों के साथ बाहर निकल रही है और उत्खनन स्थल पर पहुंचकर इतिहास जानने की जिज्ञासा दिखा रही हैं।
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