मोदीपुरम। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एग्रीविजन द्वारा विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। इसका विषय परंपरागत एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों का समन्वय है। सांसद अरुण गोविल और मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कुलपति त्रिवेणी दत्त ने विकसित उत्तर प्रदेश 2047 की परिकल्पना के लिए इस समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को नई दिशा, ऊर्जा और नवाचार की प्रेरणा देते हैं। अरुण गोविल ने भारत की समृद्ध कृषि परंपरा को संरक्षित रखने पर जोर दिया। उन्होंने आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन, स्मार्ट फार्मिंग और कृषि विविधीकरण के उपयोग का आह्वान किया। इससे उत्पादन और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने किसानों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संतुलन के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। कपिल देव अग्रवाल ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाकर गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन करने को कहा। तकनीकी समावेश से खेती अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनती है।
उद्यानिकी आयुक्त प्रभात कुमार ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उत्पादकता बढ़ाने के साथ गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संचालित ऑयल सीड मिशन और दलहन उत्पादन मिशन का जिक्र किया। इन योजनाओं के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को कृषि की आधारशिला बताया।
उपमहानिदेशक परमिंदर सिंह ने वर्तमान समय में कृषि विविधीकरण को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मशरूम, मत्स्य पालन एवं पशुपालन अपनाने की सलाह दी। इससे उनकी आय में वृद्धि हो सकेगी। उपमहानिदेशक सुधाकर पांडेय ने देश की खाद्यान्न सुरक्षा में उद्यानिकी फसलों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस क्षेत्र के विस्तार के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन में तरुण सिंह, डॉ. बिक्रम, अमन सिंह, डॉ. वीरपाल सिंह, डॉ. बिजेंद्र सिंह, डॉ. चित्रा सिंह, डॉ. डीवी सिंह, डॉ. पंकज चौहान, डॉ. आरएस सेंगर, विकास त्यागी आदि मौजूद रहे।