मेरठ। 180 संविदा अध्यापक भर्ती के ऑनलाइन टेंडर बृहस्पतिवार को सीडीओ नुपूर गोयल ने निरस्त कर बेसिक शिक्षा अधिकारी आशा चौधरी का स्पष्टीकरण मांग लिया है। आरोप है कि टेंडर अपलोड करने वाली कंपनी उन्नाव में ब्लैकलिस्टेड हुई थी और ईएमडी में भी अनियमितता मिली है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। इस प्रकरण में बीएसए कार्यालय में तैनात जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है।
बीएसए द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल व शिक्षा (ईसीसीई) के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए होने वाली 180 संविदा अध्यापकों की भर्ती करने के लिए नवंबर 2024 में टेंडर निकाला गया था। ऑनलाइन टेंडर में एक कंपनी ने अपने दस्तावेज छुपाकर अनियमितता की है, जिसकी शिकायत एक युवक ने चार दिन पहले डीएम से की थी। डीएम ने सीडीओ नूपुर गोयल, मुख्य कोषाधिकारी वरुण खरे, उपायुक्त उद्योग दीपेंद्र कुमार की एक कमेटी गठित कर जांच कराई। टेंडर में अनियमितता होने की पुष्टि हो गई। सीडीओ नुपूर गोयल ने बताया कि जिस कंपनी को टेंडर मिला है, वह उन्नाव से ब्लैकलिस्ट हुई थी। टेंडर में 11 महीने की जगह 12 महीने का अनुबंध करना शामिल कराया। ईएमडी में भी अनियमितता है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद यह टेंडर निरस्त कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने टेंडर की प्रक्रिया में बीएसए कार्यालय में तैनात अधिकारियों पर पैसे लेने का भी आरोप लगाया गया। मामला गंभीर है, जिसके चलते बीएसए से सभी स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऑनलाइन टेंडर में किसने हेराफेरी की है, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। टेंडर लेने वाली लखनऊ वेदरत्नम निजी कंपनी ने ईएमडी एक निजी बैंक में लगाई। जिसमें बताया गया कि एक करोड़ 25 लाख के टेंडर का 12 लाख रुपये जमा कर दिया है।
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टेंडर की प्रक्रिया में अनियमितता मिलने की पुष्टि हुई है, जिसके चलते संविदा अध्यापक भर्ती का टेंडर निरस्त किया गया है। जल्द ही री-टेंडर किया जाएगा। लापरवाही या अनियमितता करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई करेंगे। फिलहाल बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने स्पष्टीकरण दिया भी था, जोकि अधूरा था।
नूपुर गोयल, सीडीओ