शहर के कई प्रमुख इलाकों में पेयजल की किल्लत ने पांच लाख से अधिक आबादी को मुश्किल में डाल दिया है। गढ़ रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, शास्त्रीनगर सहित कई मार्गों पर चल रहे निर्माण कार्यों के कारण पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार सुबह लोगों ने हंगामा किया और ठेकेदारों के प्रति नाराजगी जताई। सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी से लिखित में शिकायत करने की बात कही है।
शहर में सीएम ग्रिड योजना के तहत 18 स्थानों पर सड़क और नाला निर्माण का कार्य चल रहा है। इसी क्रम में वेस्टर्न कचहरी रोड व गढ़ रोड पर नाला निर्माण के दौरान पेयजल की पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके परिणामस्वरूप, वेस्टर्न कचहरी रोड, गढ़ रोड पर गांधी आश्रम, शास्त्रीनगर, घंटाघर, खैरनगर, गोला कुआं जैसे इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति ठप पड़ गई है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कोई समुचित योजना नहीं बनाई गई। नतीजतन, कई जगहों पर निर्माण कार्य अधर में लटके हुए हैं और पानी की पाइप लाइनें टूटी हुई हैं। निगम में शिकायत किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य का हवाला देकर पानी की सप्लाई बंद रखी गई है। इससे नाराज लोगों ने अब कमिश्नर से शिकायत करने की तैयारी कर ली है।
भूजल स्तर में गिरावट का बढ़ता खतरा
यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब मेरठ में भूजल स्तर पहले से ही चिंताजनक रूप से गिर रहा है। बताया गया है कि 25 साल पहले जहां 60 से 100 फुट की गहराई पर पानी उपलब्ध था, वहीं अब यह स्तर 200 से 250 फुट तक पहुंच गया है। अनियंत्रित शहरीकरण, बढ़ती आबादी और जल संरक्षण के प्रति उदासीनता इस गिरावट के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। इस बढ़ते पेयजल संकट से निपटने के लिए तत्काल प्रभावी उपायों की आवश्यकता है। लोगों की नाराजगी इस बात पर है कि विकास कार्यों के नाम पर उनकी बुनियादी जरूरत से खिलवाड़ किया जा रहा है।