डूंगर गांव में चकरोड़ विवाद निपटाने पहुंची थी टीम, सात घंटे चली मशक्कत, एक पक्ष नहीं हुआ सहमत
भाजपा नेता और किसानों के बीच चल रहा विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहटा। डूंगर गांव में भाजपा नेता और किसानों के बीच चकरोड को लेकर चल रहे विवाद को निपटाने के लिए सोमवार को तहसील प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ गांव में पैमाइश के लिए पहुंची। सात घंटे तक चली जद्दोजहद के बाद भी तहसील टीम द्वारा की गई पैमाइश से एक पक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और टीम निशानदेही करके लौट गई। पुलिस की मौजूदगी में हुई पैमाइश के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस और नोकझोंक हुई।
सोमवार को तहसील कर्मियों की टीम नायब तहसीलदार आदेश कुमार के साथ भारी पुलिस बल को लेकर सोमवार को दस बजे गांव में मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को बुलाकर पहले काफी देर तक समझाया लेकिन जब सहमति नहीं बन पाई तो टीम ने पैमाइश शुरू की गई। महेंद्र पक्ष ने टीम से कहा कि जो चकरोड की पैमाइश की जा रही है। उक्त चकरोड के बराबर में सरकारी सिंचाई की नाली है। उसको भी रकबे के अनुसार पैमाइश कर चालू कराया जाए और जब तक सिजरा दुरुस्ती का आदेश तहसील के अभिलेख में दर्ज न हो तब तक पैमाइश न की जाए। यह सुनकर दूसरे पक्ष ने विरोध करना शुरू कर दिया।
महेंद्र पक्ष ने आरोप लगा हंगामा करना शुरू कर दिया कि तहसील टीम राजनीतिक दबाव में एक पक्षीय कार्रवाई कर रही है,जो न्यायोचित नहीं है। टीम ने दूसरे किसान के खेतों की पैमाइश कर निशानदेही करनी चाही तो वह भी एक बार को संतुष्ट नहीं हुआ। हालांकि बाद में दूसरे पक्ष ने अपनी सहमति जता दी। बाद में टीम सिजरा के अनुसार पैमाइश कर निशानदेही की कार्रवाई कर लौट गई। टीम में नायब तहसीलदार आदेश कुमार , कानूनगो मुनेश सोम, लेखपाल शिवानी, कृष्णा पाल सिंह, विनीत सिंह आदि शामिल रहे। नायब तहसीलदार आदेश कुमार का कहना है कि राजस्व अभिलेख के अनुसार चकरोड की निशानदेही कर चालू करा दी गई है।
यह है मामला
भाजपा नेता बलराज डूंगर के भाई व पूर्व प्रधान गजराज सिंह का दो माह पूर्व गांव निवासी महेंद्र व कर्ण सिंह से चकरोड़ को लेकर विवाद हो गया था। जिसमें पूर्व प्रधान गजराज सिंह पर विपक्षियों ने जानलेवा हमला कर घायल कर दिया था। पिछले माह भी तहसील टीम चकरोड को कब्जा मुक्त कराने के लिए गांव में पहुंची थी, लेकिन उस समय महेंद्र पक्ष ने चकबंदी में बगैर पैमाइश किए ही बैरंग लौट गई थी।