श्री दिगंबर जैन मंदिर पंजाबीपुरा में जैन आचार्य ने कहा उपवास में अन्न-जल का त्याग जरूरी
27 अगस्त को होगी राखी बनाओ प्रतियोगिता
28 को निर्वाण महामहोत्सव में विजेताओं का सम्मान
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्री दिगंबर जैन मंदिर जी पंजाबीपुरा में वर्षा योग के दूसरे दिन आचार्य सौरभ सागर ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा कि मनुष्य जीवन मिलना अत्यंत कठिन है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए। आचरण ही मनुष्य का असली आभूषण है। मनुष्य को ज्ञान कितना भी हो यदि आचरण शुद्ध नहीं है तो सब व्यर्थ है।
आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि उपवास का अर्थ चारों प्रकार के अन्न और जल का त्याग है। उपवास में जल ग्रहण करने से भी उसकी पूर्णता में कमी आती है। जीवन में व्रतों को शामिल करना चाहिए और अष्टमी व चतुर्दशी जैसे जैन शाश्वत पर्वों पर व्रत-उपवास कर प्रभु की आराधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु के शब्द केवल सुनना पर्याप्त नहीं है। उन्हें जीवन में उतारना जरूरी है। सदाचार और अच्छे आचरण से ही व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है।
सौरभ सागर ने कहा कि जीवन को सफल बनाता है। जैसे सोना तपकर कुंदन बनता है। वैसे ही तप और सदाचार से जीवन श्रेष्ठ बनता है। प्रातः एवं सायंकालीन गुरु भक्ति में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की चरण वंदना कर भक्ति की। मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष एवं पुष्प वर्षा योग समिति के अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि 27 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व पर राखी बनाओ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। विजेताओं को 28 अगस्त को जैन धर्मशाला रेलवे रोड पर आचार्य के मंगल सानिध्य में होने वाले श्री 1008 श्रेयांसनाथ भगवान के निर्वाण महामहोत्सव में पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में सुरेंद्र जैन, प्रेमचंद जैन, रितेश जैन, हंस कुमार जैन, अनिल जैन, विजय जैन, वीरेंद्र जैन, अक्षय जैन, राजीव जैन रहे।