मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के छात्रावास में वार्डन द्वारा छात्रों की लाठी से पिटाई की शिकायत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंच गई है। समाजसेवी आदेश प्रधान ने ईमेल के जरिए मुख्य न्यायाधीश को शिकायत भेजकर आरोपित वार्डन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उसे निलंबित करने और घटना की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। उधर विश्वविद्यालय में सोमवार को इस मामले पर प्रस्तावित बैठक नहीं हो पाई।
समाजसेवी आदेश प्रधान ने ईमेल के जरिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, जनजाति आयोग, राष्ट्रीय शैक्षणिक योजना एवं प्रशासन संस्थान, सीसीएसयू की कुलपति व कुलसचिव, उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग, एसएसपी मेरठ, एसओ मेडिकल थाना, डीएसडब्ल्यू सीसीएसयू और विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति के अध्यक्ष को शिकायत भेजी है। उसने कहा कि सीसीएसयू के छात्रावास में वार्डन डॉ. दुष्यंत चौहान द्वारा बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों पर लाठी से प्रहार किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
जिससे छात्र घायल हो गई, लेकिन विवि प्रशासन ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवाई और ना ही आरोपी को निलंबित किया गया। उल्टे पीड़ित छात्रों पर ही दबाव बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह से मानव अधिकारों का उल्लंघन है। आरोपी डॉ. दुष्यंत चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके निलंबित किया जाए। उनके छात्रवास व विवि परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगे। पीड़ित छात्रों को सुरक्षा दी जाए। घटना की जांच के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं न्यायिक समिति का गठन हो, जिसमें छात्र प्रतिनिधि, महिला प्रतिनिधि, मानवाधिकार विशेषज्ञ आदि शामिल हो। विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका की न्यायिक समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की संस्थागत हिंसा को रोका जा सके।
विवि में नहीं हो पाई बैठक
सीसीएसयू में सोमवार को इस मामले को लेकर बैठक होनी थी, लेकिन वार्डन और पीड़ित छात्रों के नहीं पहुंचने से यह बैठक नहीं हुई। विवि अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अब दूसरे तरीके से छात्रों से संपर्क किया जाएगा। ईमेल आदि के जरिए छात्रों का पक्ष लिया जाएगा।