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मजहबी एकता की सेहतमंद सुबह

Sun, 17 Apr 2016 02:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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सूरजकुंड पार्क में योगा करते शहरवासी। - फोटो : अमर उजाला
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सूर्य की पहली किरण के साथ ही सूरजकुंड पार्क में मजहबी एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां हिंदू और मुस्लिम एकसाथ योग करते हैं। एक-दूसरे को स्वस्थ रहने के टिप्स देते हैं। इनकी सुबह राम-राम और सलाम के साथ शुरू होती है। यहां धर्म, राजनीति और जाति की बात नहीं होती, बल्कि सुबह पांच बजे से सात बजे तक सेहतमंद कैसे रहा जाए, केवल इस पर चर्चा होती है। ठंडी-ठंडी हवा और मजहबी एकता के भाव से मन को बड़ा सुकून मिलता है। सुबह सवेरे बाबा मनोहर नाथ, बृहस्पति देव, शनि देव, मां दुर्गा और आर्य समाज मंदिर, गुरुद्वारे में पूजा आदि कार्य होते हैं, उनसे भी मन प्रसन्न हो उठता है। पार्क में धर्म, एकता, शांति और सेहत का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
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लगती है संघ की शाखा 
पार्क में संघ की शाखा भी लगती है। भास्कर शाखा के कार्यवाह विवेक त्यागी ने बताया कि पार्क में प्रतिदिन काफी लोग व्यायाम करने आते हैं। शाखा में मुख्य रूप से मनोज वर्मा, देवेश, राकेश गुप्ता, महेश चौधरी, प्रमोद, शेखर त्यागी, केपी सिंह हिस्सा लेते हैं। सुबह पार्क का नजारा बहुत खूबसूरत रहता है। सभी लोग एकता का संदेश देते हैं। इससे लोगों को सीख लेने की जरूरत है।

टोली में आती हैं महिलाएं 
पार्क में महिलाएं टोली में आती हैं। हरी घास में एक साथ बैठकर योगा करती हैं। एक-दूसरे का हालचाल पूछती हैं और सेहत के बारे में जानकारी लेती हैं। टोली की सदस्य शकीला ने बताया कि हम लोग सुबह रास्ते में तय जगह पर मिलते हैं, उसके बाद साथ ही आते हैं। एक-दूसरे के साथ योगा करने में अच्छा लगता है। हमें किसी के धर्म से कोई फर्क नहीं पड़ता है।  
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 फुटबाल और बैडमिंटन का मजा 
युवक और युवतियां पार्क में फुटबाल और बैडमिंटन खेलते हैं। सभी अपने-अपने ग्रुप में खेलते हैं। आर्मी और पुलिस की तैयारी करने वाले युवा भी यहां पर दौड़ लगाने आते हैं। 

पार्क में हर उम्र का संगम 
पार्क में हर उम्र के लोग आते हैं। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक घूूमने आते हैं। बच्चे खेलते हैं और युवा दौड़ लगाते हैं। वहीं बुजुर्ग तेज चाल चलकर खुद को फिट रखने की कोशिश करते हैं। 

मैं यहां पिछले चार माह से आ रही हूं। यहां आकर अच्छा लगता है। जिस दिन पार्क न आएं तो पूरा दिन ठीक नहीं गुजरता। - सलोनी

हम पिछले 25 साल से पार्क में आ रहे हैं। जब हम अपने दोस्त, सलीम, करीमुद्दीन, नवाब से मिलते हैं तो मन खुश हो जाता है। अब तो वे जीवन का हिस्सा बन गए हैं। - डॉ. दिलावार सैनी

पार्क में घूमने और व्यायाम करने से हमारा स्वास्थ्य तो अच्छा रहता ही है, साथ ही भाईचारा भी बढ़ता है। 
- अरविंद कुमार

आपसी भाईचारे की खुशबू पार्क में मिलती है। हिंदू बहनें और हम सभी एक साथ बैठकर योग करते हैं। अपने घर की बातें भी शेयर करते हैं। मन को बड़ा अच्छा लगता है। - शाहना बेगम

दो-तीन माह से हम पार्क में आकर खेलते हैं। सुबह- सुबह मंदिरों पर बजते भजनों से यहां का माहौल भक्तिमय हो जाता है, इससे मन को बड़ा सुकून मिलता है। - प्रज्ञा
 
पार्क की सुंदर हरियाली के बीच खेलना बड़ा अच्छा लगता है। प्रभु के भजनों को सुनकर मन शांत हो जाता है। खेल के साथ साथ व्यायाम भी होता है। - मोहिनी

हम पिछले दो साल से पार्क में घूमने आ रहे हैं। पार्क में बूढ़े, जवान, महिलाएं और बच्चे सभी को योग करते देखते हैं तो अच्छा लगता है। कुछ सीखने का अवसर मिलता है। - नेहा

पार्क तो बुढ़ापे में अच्छे स्वास्थ्य के लिए रामबाण साबित हो रहा है। आपसी भाईचारे का तो यहां कहना ही क्या है। सभी प्यार के साथ खेलते हैं और योग करते हैं। केदारनाथ

पार्क में प्रतिदिन योग करने और व्यायाम करने वाले किसी जाति बिरादरी में नहीं बंटे हैं। सभी स्वस्थ रहने और आपसी भाईचारे का पैगाम देते हैं। - महेंद्र बग्गा

कुछ राजनीतिक लोग भले ही समय-समय पर आपसी भाईचारे को तोड़ने का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन हम पर कोई असर नहीं पड़ता है। - आरिफ अंसारी

जो लोग छोटी-छोटी बात पर हिंदू-मुस्लिम के भाईचारे को खत्म करने की राजनीति करते हैं। उनको हमारी सलाह है कि वह सूरजकुंड पार्क जरूर आएं। - हाजी मोहम्मद इरशाद
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