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कॉलोनी विकसित कर निगम को करेंगे हैंडओवर : वीसी

Sat, 20 Aug 2016 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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योगेंद्र यादव वीसी - फोटो : अमर उजाला
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 ‘मेरठ विकास प्राधिकरण’ जैसा की नाम से ही जाहिर है कि शहर के विकास को नया आयाम देने के लिए गठित की गई संस्था। जिसकी जिम्मेदारी शहर को सुनियोजित विकास की राह पर ले जाना है, लेकिन संस्था अपने कर्त्तव्यों से भटकती नजर आ रही है। शहर में अनियोजित विकास की भरमार है। कॉलोनियां डेवलप हुई हैं तो वे दशक भर से नगर निगम को हैंडओवर नहीं की गईं। एमडीए का खजाना खाली है। ऐसे में यहां स्थानांतरित होकर आए उपाध्यक्ष योगेंद्र यादव के सामने चुनौतियों का अंबार है। एमडीए की छवि को दुरुस्त करते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने के लिए उन्हाेंने क्या तैयारियां की हैं और उनका दृष्टिकोण क्या है? यह सब वीसी ने अमर उजाला के मंच पर साझा किया।
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सवाल: एमडीए का जिक्र आते ही आम जनमानस के जेहन में उसकी नकारात्मक छवि बनती है। यहां समस्याओं का अंबार है। इस छवि को कैसे सुधारेंगे ?
जवाब : यह बात सही है। मेरी प्राथमिकताओं में इस छवि को बदलना पहले नंबर पर है। एमडीए के अधिकारियों, कर्मचारियों की छवि ठीक बने। इसके लिए सबसे जरूरी है समय पर ऑफिस आना जाना। मैं खुद ठीक दस बजे ऑफिस आता हूं और आप देखिए कि एमडीए में अब आपको अधिकतर अधिकारी इसी समय अपने ऑफिस में मिलेंगे। लोगों के काम समय पर होंगे तो छवि निश्चित रूप से सकारात्मक बनेगी।

सवाल: शहर में कालोनियां तो डेवलप हो रही हैं, पर हैरत की बात यह है कि 15-15 साल से इन्हें नगर निगम को हैंडओवर नहीं किया गया है। कमाल यह कि जिसमें एमडीए वीसी का निवास है, वह कॉलोनी रक्षापुरम तक भी निगम को हैंडओवर नहीं की गई है।
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जवाब: यह बड़ी समस्या है। मैंने संबंधित अधिकारियों को बुलाकर कहा है कि ऐसी कॉलोनियाें में विकास कार्य पूरे करें और जल्द उन्हें निगम को हैंडओवर किया जाए। इस पर काम शुरू हो गया है। कॉलोनियों का सूची बनाई जा रही है, जल्द काम शुरू होंगे। उसके बाद वह निगम को हैंडओवर कर दी जाएंगी।

सवाल: किसानों के मुद्दे अटके हैं। तीन योजनाओं के किसानों से समझौता करने के बावजूद एमडीए ने उसे लागू नहीं किया। उधर, शताब्दीनगर में किसान दो साल से आंदोलन की राह पर हैं। कैसे पार पा सकेंगे?
जवाब: आंदोलन की जरूरत तो तब आती है जब अधिकारी बात सुनने को उपलब्ध न हो। मैंने किसानों से भी स्पष्ट कहा है कि बातचीत के लिए मेरे दरवाजे हर समय खुले हैं। जब चाहें तब बातचीत करें। इसी आधार पर सारी समस्या का हल निकलेगा। मैं पूरे प्रकरण का अध्ययन कर रहा हूं कि क्या हो सकता है?

सवाल: किसान पैसा मांग रहे हैं, एमडीए कह रहा है कि पैसा नहीं हैं। ऐसे कैसे बात बनेगी?
जवाब : आय के साधन विकसित करेंगे। ऐसी जमीन का चयन करेंगे जिससे पैसा आ सकता है। शमन शुल्क बढ़ाएंगे। सबसे ज्यादा कमाई शमन शुल्क से ही होती है।

सवाल: पूरे शहर में अवैध निर्माणों की बाढ़ है। कई सौ अनाधिकृत कॉलोनियां बस गई हैं। इधर, एमडीए ने वर्ष 2008 के बाद अवैध कालोनियों का सर्र्वे तक नहीं किया है।
जवाब: सर्वे होगा। कोशिश यह रहेगी कि कुछ कॉलोनियाें को शुरुआती दौर में रेग्युलर किया जाए। अन्य अवैध निर्माणों पर शमन शुल्क वसूला जाएगा। इसके लिए जोनल प्रभारियों को अलर्ट भी कर दिया है।

सवाल: कुछ ऐसे प्रस्ताव हैं जो यहां सपना हो गए हैं। इनमें इनर रिंग रोड, बस अड्डों की शिफ्टिंग, मल्टी लेवल पार्किंग, जुर्रानपुर फाटक पर ओवरब्रिज, टीपी नगर की शिफ्टिंग, प्रमुख हैं।
जवाब: मैंने खुद इन सब स्थानों पर घूमकर देखा है। संबंधित अधिकारियों से जानकारी भी ली है। अवरोध दूर करने के लिए कहा गया है।

सवाल: अवरोध तो सरकारी विभाग भी खडे़ कर रहे हैं। इनर रिंग रोड में सिंचाई विभाग ने साफ कह दिया है कि रजवाहे पर काम नहीं होगा। साइकिल ट्रैक पर पीडब्लूडी अड़ंगा लगा रह है।
जवाब: इसके लिए मैंने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। चूंकि वर्तमान मुख्य सचिव पहले प्रमुख सचिव सिंचाई भी रह चुके हैं तो सभी प्रकरणों को भली भांति समझते हैं। उम्मीद है कि सरकार के स्तर पर मसला निपट जाएगा।

सवाल: कोई ऐसा काम करना चाहते हैं कि लोग सराहें और एमडीए को इसके लिए बार-बार याद किया जाए।
जवाब: चाहता हूं, पर शहर के लोगों को इसमें सहयोग करना होगा। मैं उदाहरण देता हूं। एक भवन गिरा जिसमें दो लोगों की मौत हुई। निर्माण अनाधिकृत था, जिसमें एमडीए भी दोषी है। पहला दोषी वह व्यक्ति है जिसने इस भवन का नक्शा पास नहीं कराया। हालांकि यह बात दीगर है कि घटिया निर्माण सामग्री के कारण बिल्डिंग गिरती है पर यदि यहां के नागरिक भी सही कामों में सहयोग करें तो इस शहर को सुंदर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
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