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कंगना रणौत के पक्ष में उतरी युवतियां, कहा कार्रवाई का यह तरीका है गैर कानूनी, खुद गुनहगार बना बीएमसी

Thu, 10 Sep 2020 10:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कंगना रनौत (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter @KanganaTeam
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कंगना रणौत के दफ्तर पर अचानक बुलडोजर चलवाकर उसे गिरवाना गलत है। अगर कंगना ने अवैध निर्माण किया है तो इतने दिन से बीएमसी खामोश क्यों था। जब न्याय के लिए आवाज उठाई तो उनका दफ्तर तोड़ दिया गया। उनके बयान के बाद इस तरह दफ्तर तोड़ना गैर कानूनी है। बॉलीवुड अभिनेत्री के दफ्तर ढहाने की घटना से देशभर में बवाल मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पिछले दो दिनों से यह मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। मेरठ शहर की युवतियों, महिलाओं ने भी इसे गलत बताया है। 
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नियमानुसार करते कार्रवाई  
किसी ने अवैध निर्माण किया है तो उसे पहले नोटिस दिया जाता है। बताया जाता है कि निर्माण गलत है। एक दिन पहले बताकर दूसरे दिन अचानक जाकर घर तोड़ा नहीं जाता। बीएमसी नियमानुसार कार्रवाई करती तो वह ठीक होता। - मुस्कान शर्मा

नागरिक अधिकारों का हनन  
कंगना एक स्वतंत्र महिला है। उसके कार्यालय को ऐसे समय तोड़ा गया जब हर भारतीय आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। यह भारतीय नागरिक के अधिकारों का हनन है। - डॉ. पूजा गुप्ता, एचओडी फाइन आर्ट, सुभारती विवि  
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यह दुर्व्यवहार गलत है    
कंगना मेरी पसंदीदा अभिनेत्री हैं। वह कभी गलत का साथ नहीं देती। हमेशा गलत के खिलाफ आवाज उठाती हैं। अभी भी वह सुशांत के लिए न्याय की मांग कर रही थीं। न्याय मांगने पर ऐसे दुर्व्यवहार होता है तो यह गलत है। - प्रभूर्ति शुक्ला   

अब क्यों खामोश बॉलीवुड  
मुंबई सरकार कंगना से इतनी क्यों डर गई कि अचानक उनका दफ्तर ही गिरवा दिया। छोटी-छोटी बातों पर विचार रखनेे वाला पूरा बॉलीवुड कंगना के साथ हुए अन्याय पर चुप्पी साधे है। साफ है कि कंगना जिस परिवारवाद परंपरा का विरोध करती हैं, बॉलीवुड में वही परंपरा है। -चंचल 
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नेपोटिज्म, राजनीति चला रही फिल्म इंडस्ट्री  
भारत जनतंत्र के लिए जाना जाता है। यहां शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार हर नागरिक को है। मगर एक महिला जब यह आवाज उठाती है तो उसका घर तोड़ दिया जाता है। नेपोटिज्म और राजनीति ही फिल्म इंडस्ट्री को चला रही है यह आज साबित हो गया। -अनुष्का 

बीएमसी का बहुत गलत कदम  
बीएमसी के खिलाफ हूं। यह कार्रवाई गलत और लोकतंत्र के खिलाफ है। कंगना के वकील ने बीएसमी से कंगना के आने का इंतजार करने का अनुुरोध किया था, लेकिन बीएमसी ने 24 घंटे में उनके दफ्तर को नष्ट कर दिया। -निकिता नागर
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