आयकर विभाग इस समय काला धन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में जुटा है। विभागीय अधिकारी ऐसे लोगों की मेरिट तैयार कर रहे हैं। इसमें सबसे पहले सरकारी विभागों के अधिकारी, अभियंता, क्लर्क के साथ ही शिक्षण संस्थान संचालक हैं। इसके बाद सराफा व्यवसायी और बिल्डरो के साथ कुछ ठेकेदार भी हैं। इनमें एक दर्जन से ज्यादा लोगों को विभाग ने कार्रवाई की टॉप सूची में रखा है।
आयकर विभाग ने बैंक से लेनदेन की तमाम जानकारी जहां इकट्ठा कर ली है। वहीं, चर्चाओं के बीच संदेह के दायरे में आने वाले लोगों की फोन रिकॉर्डिंग भी नोटबंदी के बाद से शुरू कर दी थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो सामान्य नोटिस की प्रक्रिया से अलग विभाग ने ऐसे संदिग्धों की सूची तैयार की है, जिनके पास काला धन होने की संभावनाएं सबसे ज्यादा जतायी जा रही हैं। इनमें निर्माण और विकास कार्यों से जुड़े अभियंताओं के साथ ही विकास प्राधिकरणों, आवास विकास और पावर कारपोरेशन के कुछ अधिकारी और अभियंता के अलावा कुछ अन्य विभागों के अधिकारी और क्लर्क भी शामिल हैं।
शहर में तैनात कई अधिकारी नोट बंदी के बाद कुछ दिन कार्यालयों से नदारद रहते हुए कहीं ओर सक्रिय नजर आये। ऐसे अधिकारियों को विभाग ने चिह्नित किया है। वहीं चर्चा है कि कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जिनकी निकटता इस समय ऐसे व्यापारियों और उद्यमियों से बन गयी, जो बिल्डर बन चुके हैं। इनके माध्यम से अधिकारियों ने अपना काला धन खपाने का प्रयास किया है।
सर्विलांस बनेगा कार्रवाई का आधार
एक बड़े अधिकारी की मानें तो आयकर विभाग ने कई विभागों के अधिकारियों, इंजीनियरों और क्लर्कों के साथ ही उनसे जुड़े बड़े व्यापारी, उद्यमी और बिल्डरों के फोन भी सर्विलांस पर लिए हैं। उनसे बातचीत के साथ ही उस समय की लोकेशन आदि पर पूरी रिपोर्ट तैयार हो रही है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आयकर विभाग तैयारी में जुटा है।