स्वच्छता सर्वेक्षण 2019-20 के तहत स्वच्छता जांचने के लिए उप्र सरकार की टीम ने मेरठ में डेरा डाल रखा है। टीम गोपनीय तरीके से स्वच्छता का आंकलन कर रही है। इसके बाद जनवरी के पहले सप्ताह में स्वच्छता सर्वेक्षण की फाइनल रिपोर्ट तैयार करने के लिए केन्द्र सरकार की टीम पहुंच रही है। स्थलीय निरीक्षण और जनता से लिए गए अपडेट के अनुसार ही मेरठ की स्वच्छता तय की जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी मेरठ का नाम लगातार गंदे शहरों की सूची में शामिल हो रहा है। शहर में जगह जगह शौचालय, पेशाबघर भी बने हैं, लेकिन स्वच्छता के नाम पर उनका परिवर्तन नहीं हो पाया है। कहीं पर भी सफाई नहीं हो रही है। ऐसी स्थिति में फिर से शहर स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची में पिछड़ने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि पहले चरण में मेरठ पहुंची सर्वे टीम शहर में जगह जगह पहुंचकर गंदगी और कूड़े के हाल देख रही है। वीडियोग्राफी की जा रही है। इसकी भनक निगम प्रशासन को भी नहीं है।
दीवारों तक सिमटा स्वच्छ भारत मिशन
शहर में स्वच्छ भारत मिशन सड़क किनारे कुछ दिवारों तक सिमटा है। खासकर सिविल लाइन इलाके में सड़क किनारे कुछ दीवारों पर स्वच्छ भारत मिशन का संदेश देतीं पेंटिंग बनाई गई हैं। पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है। हालांकि इन इलाकों में पहले से ही सड़कें साफ रहती हैं, क्योंकि यह वीआईपी इलाका है।
वर्जन
स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए काम चल रहा है। मुख्य मार्गों की सफाई को प्राथमिकता पर लिया गया है। लगातार स्वच्छता की निगरानी की जा रही है। स्कूल कालेजों में छात्र-छात्राओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाईं जा रही हैं।
-डॉ. गजेन्द्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।