मेरठ। अयोध्या प्रकरण पर फैसले को लेकर शनिवार को शहर संगीनों के साये में रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा रहा। एडीजी जोन, कमिश्नर, डीएम व एसएसपी फोर्स के साथ पैदल ही शहर का जायजा लेते रहे। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों पर खास फोकस रहा। कानून व्यवस्था बनाए रखने की अग्निपरीक्षा में पुलिस-प्रशासन सफल रहा।
फैसला सुबह 10:30 बजे आना था। लेकिन सुबह 7:00 बजते ही आरएएफ, पीएसी और पुलिस बल ने शहर को सुरक्षा घेरे में लेना शुरू कर दिया था। सुबह 7:30 बजे पुलिस कंट्रोल रूम से हर थाने से पुलिस बल के बारे में पूछना शुरू हो गया। सभी सीओ और थानेदारों से उनकी लोकेशन और अपडेट लिया गया। सुबह 8:00 बजे एडीजी जोन प्रशांत कुमार और एसएसपी अजय साहनी ने एसपी सिटी और एसपी देहात से बात कर शहर के अतिसंवेदनशील और संवेदनशील प्वाइंटों पर तैनात पुलिस, पीएसी, आरएएफ के बारे में जानकारी ली। सुबह 9:00 बजे के आसपास एडीजी और एसएसपी कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम, डीएम अनिल ढींगरा के साथ शहर में निकल गए।
सुबह ठीक 10:30 बजे फैसला आना शुरू हो गया। इस दौरान पुलिस फोर्स हाई अलर्ट रहा। पुलिस-प्रशासन के सभी आला अधिकारी सड़कों पर थे और स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए थे। फैसला आने के बाद पूरे शहर ने संयम और सौहार्द का परिचय दिया। कहीं से भी किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। दोपहर तक आला अधिकारी शहर में सक्रिय रहे।
कंट्रोल रूम से पल पल की जानकारी
पुलिस लाइन और कलक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम से जिले की पल-पल की जानकारी ली जाती रही। एक माह से पुलिस-प्रशासन की चल रही योजना सफल रही। हापुड़ अड्डा चौराहा, भूमिया का पुल, घंटाघर, शास्त्रीनगर एल ब्लॉक, बुढ़ाना गेट व बेगमपुल सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ा पहरा रहा। फैसले आने के बाद आतिशबाजी करने पर शहर से सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।