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शहर में चीन का 259.50 करोड़ का सालाना कारोबार

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बाजारों में 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक चीन का ही माल बेचा जाता है
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ज्यादा मुनाफे के साथ कम कीमत पर उपलब्ध हो जाते हैं चीनी आइटम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शहर में चीन के माल ने पिछले 15 सालों में अच्छी पकड़ बना ली है। बाजारों में विभिन्न सेग्मेंट में 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक चीन का ही माल बेचा जाता है। कम कीमत का होने के कारण ग्राहक चीनी सामान की डिमांड करते हैं। वहीं डिमांड और ज्यादा मुनाफा होने के कारण व्यापारी भी चीन का सामान बेचते हैं
शहर में एक सीजन में करीब 129.75 करोड़ का चीनी सामान बिक जाता है। सालाना इसका आंकड़ा 259.50 करोड़ को पार कर जाता है। होल सेलर और रिटेलरों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार खाद्य पदार्थ तक में भी अब चीन ने अपनी अच्छी पकड़ बना ली है।
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व्यापारियों ने ली चीन के प्रोडक्ट न बेचने की शपथ
लद्दाख में देश के जवानों के शहीद होने से व्यापारियों में चीन के प्रति गुस्सा है। ऐसे में व्यापारियों ने चीन के माल के बहिष्कार की शपथ ली है। संयुक्त व्यापार संघ, पश्चिम उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल, सदर व्यापार मंडल सहित अन्य व्यापार संघों ने चीन के माल के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। उधर, जनकल्याण वेलफेयर सोसायटी और रोहटा रोड व्यापार संघ ने बृहस्पतिवार को चीन के माल की होली जलाई।
त्यौराहों पर रहती है सर्वाधिक डिमांड
शहर में त्योराहों के सीजन में चीन के माल की सर्वाधिक डिमांड रहती है। दीपावली पर जहां इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रॅानिक्स बाजार में 80 प्रतिशत सेल चीन के प्रोडक्ट की होती है वहीं आम दिनों में भी बाजारों में चीन के बने सामान की खासा बिक्री होती है। हर त्यौहार में खरीदा जाने वाले समान में 50 प्रतिशत से अधिक चीन से आयात हुआ होता है।
इन बाजारों में चीन की घुसपैट
मशीनरी, टेलीकॉम उपकरण, बिजली से जुड़े उपकरण, ऑर्गेनिक केमिकल्स, खाद, गार्मेँट, फुटवियर, बैग, कॉस्मेटिक आइटम, सूटकेस, बेल्ट, मोबाइल एक्सेसीरीज, कन्जूमर ड्यूरेबल, ग्लास, क्राकरी, गिफ्ट आइटम, एसी, फ्रिज आदि हैं।
ये है बाजार में छह माह की सेल का सीजनल आंकड़ा
आइटम दुकानें एक व्यापारी की सेल बाजार की सेल
इलेक्ट्रिक स्विच, बल्ब 350 4 लाख 14 करोड़
गार्मेंट 700 1 लाख 7 करोड़
कास्मेटिक्स 1200 1 लाख 12 करोड़
फुटवेयर फेंसी 800 1.5 लाख 12 करोड़
बेग, बेल्ट, सूटकेस 700 2 लाख 14 करोड़
लेपलॉक, मोबाइल, गैजेट 600 3 लाख 18 करोड़
हार्डवेयर 450 150 लाख 6.75 करोड़
स्टेशनरी 800 50 हजार 4 करोड़
कन्जूमर ड्यूरेबल 850 1 लाख 8.50 करोड़
ग्लास, क्राकरी 450 1.50 लाख 6.75 करोड़
डेेकोरेटिव आइटम 300 2 लाख 6 करोड़
गिफ्ट आइटम 850 1.50 लाख 12.75 करोड़
एसी, इलेक्ट्रानिक्स 800 1 लाख 8 करोड़
नोट: यह आंकड़ा शहर के व्यापार संघों, बाजार के अध्यक्षों और संबंधित सेग्मेंट के व्यापारियों से लिया गया है।
ये बोले व्यापारी
स्वदेशी अपनाना जरूरी
व्यापारियों से अपील गई है कि चीन के माल को न बेंचे। साथ ही ग्राहक भी इस बात का ध्यान रखें और चीन के माल से दूरी बनाएं। भारतीय होते हुए हमारा ये ही दायित्व है। - नवीन गुप्ता, अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संघ।
इलेक्ट्रिक पर प्रतिबंध आवश्यक
देश में अगर चीन की घुसपैट रोकनी है तो सर्वप्रथम इलेक्ट्रिक सामान पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जब स्वदेशी होगा तो सब स्वदेशी ही बेचेंगे। ऐसे में देश के लोगों को रोजगार मिलेगा। पियुष वशिष्ठ, शर्मा टेलीकॉम, रुड़की रोड।
देश हित में ही व्यापारी का हित
देश का विकास होगा तभी व्यापारी का विकास होगा। ऐसे में व्यापारी को चीन के माल का बहिष्कार करना चाहिए। चीन के डेकोरेटिव आइटम, क्राकरी, कटलरी, गिफ्ट आइटम बेचने होने चाहिए - सचिन अग्रवाल, एसके डेकोरेटर्स, सुभाष बाजार।
स्वदेशी ही खरीदे जाने चाहिए
इलेक्ट्रानिक्स आइटम से जुड़ी वस्तु जिसमें एसी, फ्रिज, माइक्रोवेव, कूलर, पंख, ट्यूबलाइट, बल्ब आदि सभी स्वदेशी ही खरीदे जाने चाहिए। नीरज कौशिक, भगवती इलेक्ट्रिक कंपनी, मवाना रोड।
स्वदेशी से लघु उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
स्वदेशी माल के उपयोग से लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। किचन, बाथरूम, बेडरूम में उपयोग होने वाली वस्तुओं पर नजर डालें तो इमसें 70 प्रतिशत चाइनीज आइटम होता है। - पंडित आशु शर्मा, शर्मा प्लास्टिक, मैन्यूफेक्चरिंग कंपनी।
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स्वदेशी कास्मेटिक्स का ही प्रयोग
देश में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हमें स्वदेशी प्रोडक्ट का ही प्रयोग करना होगा। इसके लिए सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं में ज्यादातर चीन के प्रोडक्ट का उपयोग होता है। अब स्वदेेशी प्रोडक्ट ही प्रयोग किए जाएंगे। विजय ओबराय, निखार ब्यूटी पार्लर, सदर।
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