नाहिदा अख्तर जैसी और भी महिलाएं हैं, जो भारतीय नागरिकता पाने की आस लगाए बैठी हैं। कई अन्य महिलाओं ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया हुआ है। खास बात यह है कि इन महिलाओं के बच्चे देश में ही पैदा हुए, जिसके चलते वह हिंदुस्तानी हैं, लेकिन उनकी मां पर पाकिस्तानी नागरिकता होने का ठप्पा लगा हुआ है।
जिले में कई पाकिस्तानी नागरिकता प्राप्त महिलाएं करीब 20, 30 साल से शामली जनपद में रह रही है। प्रत्येक महिला को लांग टर्म वीजा (एलटीवी) पर रहना पड़ रहा है। इतने लंबे समय तक भारत में रहने के बावजूद नागरिकता नहीं मिल पाने की टीस मन में रहती है। महिलाओं का कहना है कि शादी के बाद महिला अपना घर छोड़ देती है और पति का घर ही उसका घर हो जाता है। बावजूद इसके पाकिस्तान में पैदा हुई इन महिलाओं को पति के यहां भी बेगानों की तरह रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले में ऐसी आठ महिलाओं ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है, जो पाकिस्तानी हैं। यह सभी महिलाएं एलटीवी पर रह रही हैं।
नागरिकता मिलने की उम्मीद जगी
शहर के मोहल्ला काजीवाड़ा निवासी सलाउद्दीन की शादी पाकिस्तान के लाहौर निवासी शगुफ्ता के साथ हुई थी। 1983 से शगुफ्ता शामली में अपने पति के यहां रहती है। परिवार में दो बेटी तथा दो बेटे हैं। पति सलाउद्दीन ट्रैक्टर मैकेनिक हैं। बच्चे और पति हिंदुस्तानी है, लेकिन शगुफ्ता आज भी पाकिस्तानी नागरिक के रूप में रहती है। 20 साल पूर्व शगुफ्ता ने भारतीय नागरिकता पाने के लिए आवेदन किया था। शगुफ्ता का कहना है कि उम्मीद लगाए बैठी हूं कि भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।