करीब आधा घंटे बाद बबीता का ध्यान मोहित पर गया तो वह गायब मिला। आसपास तलाश करने के बाद भी मोहित का पता न चला तो बबीता ने पति और ससुर को फोन कर घर बुला लिया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और परिजनों ने रजवाहे की पटरी से होते हुए तलाश की तो काफी दूर मोहित का शव रजवाहे में बहता हुआ मिला। पुलिस ने बच्चे का शव निकालवाया। लेकिन परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। बाद में शव को गांव के श्मशान घाट में दफना दिया गया।
बार-बार अपने को कोसती रही मां
इकलौते बेटे को खोने के बाद मां बबीता बदहवास हो गई। वह मासूम के शव के पास बिलखते हुए खुद को कोस रही थी। यही कह रही थी कि उसने घर का काम करते समय मोहित पर ध्यान क्यों नहीं दिया। अगर वह उसका ध्यान रखती तो बच्चे के साथ यह हादसा न होता। जरा सी भूल ने उसका बच्चा छीन लिया। वहीं, पिता अरविंद व दादा अनुज भी सिर पकड़कर बैठे थे। यही कहते रहे कि काश हम उसे बचा पाते। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था।
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