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चीयर अप द लोनली डे आज : नजरिया बदलने से बदल जाएगी जिंदगी, ऐसा करने से होगा समाधान

Sun, 11 Jul 2021 12:36 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि अकेलापन आम समस्या बन रहा है। जिला अस्पताल की उनकी ओपीडी में ऐसे बहुत केस आते हैं।
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तनाव - फोटो : file photo
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विस्तार
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सबकी जिंदगी में कभी न कभी ऐसा मौका आता है, जब वह खुद को अकेला महसूस करता है। मुश्किल जरूर होती है, लेकिन अकेलापन लाइलाज समस्या नहीं है। यकीन मानिए, इस समस्या को दूर करना बेहद आसान है। सिर्फ नजरिया बदलकर अकेलेपन को दूर किया जा सकता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति तनाव का शिकार हो रहा है।
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नौकरी और रिश्तों को लेकर सबसे ज्यादा तनाव है। ऐसे में इंसान न सिर्फ निराश होता है, बल्कि खुद को बेहद अकेला महसूस करने लगता है। कोरोना काल में समस्या और बढ़ गई है। इससे बचने के लिए अपने परिवार से जुड़े रहें। ऐसे लोगों से संपर्क करें, जिनके साथ रहने से या बात करने से खुशी मिलती है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 11 जुलाई को चीयर अप द लोनली डे मनाया जाता है। 

बढ़ रहे मरीज, आते हैं आत्महत्या के विचार 
मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि अकेलापन आम समस्या बन रहा है। जिला अस्पताल की उनकी ओपीडी में ऐसे बहुत केस आते हैं। अकेलेपन के कारण आत्महत्या तक के विचार लेकर आते हैं। उन्हें सलाह दी जाती है कि लोगों से बातचीत करना शुरू करें। दोस्त बनाइए। इसमें परिवार की जिम्मेदारी भी अहम है। उन्हें भी ध्यान रखना चाहिए। अगर कोई सदस्य गुमसुम या उदास है तो उससे खुलकर बात करने की जरूरत है।
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सामाजिक होने की दी जाती है सलाह 
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि अकेलापन खतरनाक हो सकता है। यही वजह है कि इंसान को हमेशा सामाजिक होने की सलाह दी जाती है। अगर कोई व्यक्ति कभी मुसीबतों में फंसता भी है, तो लोगों की सांत्वना और हिम्मत भरे शब्द उसे अकेलेपन की गर्त में जाने से रोक सकते हैं।

सेहत के लिए खतरनाक 
क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट डॉ. विभा नागर का कहना है कि अकेलापन एक बीमारी भी है, जिसका व्यक्ति की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अकेलेपन का शिकार लोगों को डिप्रेशन होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। लोगों का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है और उनमें बिना मतलब गुस्सा और चिड़चिड़ापन आ जाता है। लंबे समय तक अकेला रहने से नींद से जुड़ी दिक्कतें सामने आने लगती हैं। 

नेशनल मेंटल हेल्थ क्राइसिस हेल्पलाइन पर लोग बयां कर रहे दर्द
केस-1  मैं कारोबारी हूं। कोरोना काल में कारोबार चौपट हो गया। अब किसी से न तो बात करने का मन करता है और न ही मिलने का। आत्महत्या का विचार आता है। परिवार है, पर खुद को अकेला महसूस कर रहा हूं।

केस-2  निजी कंपनी की जॉब छूट गई है। कभी डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा हो जाते हैं और कभी कम। मुझे पता नहीं चलता कि आगे क्या करना है। इसलिए कई बार सब कुछ ठप सा हो जाता है। खुद को अकेला पाता हूं। मन में नकारात्मक बातें ही आती हैं। 
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ऐसे करें अकेलापन और तनाव दूर
- अच्छा खाएं, नींद पूरी लें, कसरत करें।  
- अपनों के संपर्क में रहें, खुद को व्यस्त रखें। 
- तनाव को दूर करने के लिए धूम्रपान, शराब या ड्रग्स का सेवन न करें। 
- खुद को समझाएं कि आप अकेले नहीं हैं। समय के साथ परेशानी भी दूर हो जाएगी। 
- सामाजिक होने की कोशिश करें। लोगों से घुले मिलें, बातचीत करें।

दामाद ने निकाल दिया घर से 
घर और जमीन बेचकर ओमप्रकाश ने पांच बेटियों की शादी की थी। सिर छिपाने का ठिकाना न होने पर वह हरिद्वार में आम के बाग में चौकीदारी करने लगा। उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होता गया। इस बीच वह शास्त्री नगर निवासी दामाद के यहां आ गया। कुछ साल बेटी के साथ रहा। घर का काम करने में असमर्थ होने पर वृद्ध को दामाद ने घर से निकाल दिया। पीवीएस मॉल के बाद बीमार अवस्था में देख समाजसेवी दीपक जोशी ने उसे अस्पताल पहुंचाया। 

दूसरों के लिए छोड़ गया सब कुछ
पाकित्सान से मेरठ आए सरदार बेअंत सिंह ने अकेले जीवन बिताया और अंत समय में जाते समय लाखों की संपत्ति और दुकान दूसरों के नाम कर चले गए। 85 वर्ष की आयु में बेअंत सिंह का स्वर्गवास हुआ। रिक्शा चलाकर लाखों रुपये इकट्ठे किए, जिससे बेअंत सिंह ने दो लड़कियों की शादी कराई। जिस दुकान में बेअंत रह रहा था, वह भी एक युवक के नाम कर गया।
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