आरोपी पवन विवि की कर्मचारी कल्याण परिषद का चुनाव जीतकर अध्यक्ष बना था। एसटीएफ की टीम ने उसे कैंपस से पकड़ा तो कर्मचारी यूनियन के लोग एकत्र हो गए। उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफिस में इस तरह से कर्मचारियों को पकड़ने का विरोध कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने कुलपति के दफ्तर में पहुंचकर हंगामा कर दिया कि ऐसे बिना बताए कैसे टीम किसी को पकड़कर ले जा सकती है। इस पर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सबको डपट दिया। स्पष्ट कह दिया कि ये एसटीएफ की टीम है, आप लोगों से पूछकर कार्रवाई नहीं करेगी। अगर कोई इतना गंभीर काम कर रहा है तो उसको एसटीएफ पकड़ेगी ही। कुलपति की डपट के बाद कर्मचारी चुपचाप वहां से निकल लिए। कुलपति ने साफ कहा कि ऐसा अपराध करने वालों के साथ विश्वविद्यालय कतई नहीं रहेगा।
ताबड़तोड़ दबिश से मचा हड़कंप
एसटीएफ की टीम ने शनिवार को आंसर बुक सेंटर के पास से कार्यालय अधीक्षक पवन कुमार को उठाया तो हड़कंप मच गया। इसके बाद टीम ने कांशीराम शोध पीठ पहुंचकर यहां पर कॉपियों की देखरेख में लगाए गए चतुर्थ क्लास कर्मचारी कपिल को उठा लिया। ताबड़तोड़ दबिश से पूरे विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा रहा। हर कोई एसटीएफ की टीम के छापे को लेकर बात कर रहा था।
एसटीएफ ने इस स्कैंडल के पीछे काम करने वाले रैकेट को शुक्रवार से ही चिह्नित कर लिया था। सबसे पहले बिजनौर निवासी कविराज को पकड़ा गया। उसने बताया कि एमबीबीएस की कॉपी बदलने के काम को वह कार्यालय अधीक्षक पवन कुमार, चतुर्थ कर्मचारी संदीप और कपिल के साथ मिलकर अंजाम दे रहा था। इसी के चलते एसटीएफ ने पूरी फील्डिंग लगा रखी थी। पवन और कपिल को कैंपस से पकड़ा तो संदीप की ड्यूटी एमबीबीएस के सेंटर से कॉपियां लानी की थी। उसे एसटीएफ ने विवि के गेट पर ही दबोच लिया। इस पूरी कार्रवाई से विवि में हड़कंप मचा रहा। हर कोई कार्रवाई को लेकर आशंकित दिखा।
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