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चरित्र निर्माण भाषण से नहीं, आचरण से होता है : जगराम

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विज्ञान विभाग और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में छात्रों के चरित्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर संवाद कार्यक्रम किया गया। इसमें शिक्षकों से भी आचरण में बदलाव लाने का आह्वान किया गया।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के विश्वविद्यालय संयोजक प्रो. अनिल मलिक ने सभी का स्वागत किया और मुख्य वक्ता जगराम (उत्तर एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास) का परिचय कराया। प्रो. मलिक ने कहा कि आज के दौर में ज्ञान की कोई कमी नहीं लेकिन संस्कारों की कमी साफ दिख रही है। ऐसे में शिक्षक की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
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मुख्य वक्ता जगराम ने कहा कि चरित्र निर्माण भाषण से नहीं बल्कि आचरण से होता हे। यह अलग विषय नहीं, जिसे कक्षा में पढ़ाया जाए। यह शिक्षकों और अभिभावकों के रोजमर्रा के आचरण से छात्रों में खुद-ब-खुद विकसित होता है। उन्होंने कहा शिक्षक समाज का शिल्पकार है। उसका व्यवहार, बोलचाल, समय पालन और नैतिक नजरिया सीधे छात्रों पर असर डालता है।
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उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे खुद को सिर्फ विषय विशेषज्ञ न समझें बल्कि माता-पिता की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने बताया कि यदि हम छात्रों को सुबह जल्दी उठना, अनुशासन, समय का सम्मान, सत्य बोलना और ईमानदारी सिखाना चाहते हैं तो पहले हमें ये आदतें अपनानी होंगी। संचालन डॉ. लक्ष्मण नागर ने किया। उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण जीवन की अमूल्य पूंजी है। इस मौके पर न्यास के संरक्षक प्रो. हरेंद्र सिंह, प्रांत संयोजक डॉ. वीरेंद्र तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रो. एसएस गौरव, डॉ. योगेंद्र कुमार सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
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