सूबे की सरकार बदलते ही प्रशासनिक अधिकारियों के चेहरों के रंग भी बदल गए हैं। कई अफसरों के चेहर जहां चमके हैं, तो कई के फीके पड़ गए हैं। इनमें कई अधिकारी तो नवनिर्वाचित विधायकों के यहां होली की बधाई तक देने पहुंचे। ऐसे में साफ है कि सरकार का गठन होते ही सबसे पहले जिलास्तरीय अधिकारियों का बदलाव होना तय है।
प्रदेश में चुनाव से पहले सपा ने अपने खास अधिकारियों को जनपद में तय किया था। हालांकि चुनाव आयोग की सख्ती और हर विधानसभा पर प्रेक्षक की तैनाती के कारण चुनाव में कहीं कोई गड़बड़ हुई हो, यह नजर नहीं आया। लेकिन कुछ मामलों में जरूर प्रशासनिक कार्रवाई पर अंगुली उठी। इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग और प्रेक्षकों के सामने की गयी। वहीं, चुनाव में कुछ प्रशासनिक अफसरों के बीच समन्वय बिगड़ा नजर आया।
शनिवार को मतगणना के बाद ही अधिकारियों के चेहरे बदलने शुरू हो गये थे। किसी का चेहरा चमक रहा था तो कोई परेशान नजर आ रहा था। कई अधिकारी अपना जाना तय मान चुके हैं। लेकिन उन्हें चिंता है कि उनका तबादला किसी अन्य जनपद में इसी हनकदार पोस्ट पर होगा या फिर किसी निष्क्रिय कुर्सी पर बैठा दिया जायेगा।
दरअसल सिर्फ चुनाव ही नहीं चुनाव से पहले कई मामले ऐसे रहे हैं, जिन्हें लेकर कई अफसर भाजपाइयों के सीधे निशाने पर हैं। प्रशासनिक हलके में कमिश्नर, जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारियों से लेकर एसीएम तक सरकार बदलने के बाद हटाये जाने को लेकर चर्चा में है। अब देखना ये है कि इन अधिकारियों में कौन जाता है और कौन रुकता है? और जो जाएगा, उसे क्या प्रोटोकाल मिलेगा। इसे लेकर कलक्ट्रेट कर्मचारियों के बीच पूरा दिन चर्चा होती रही।