याचिकाकर्ता का दावा- गलत तरीके से फंसाया गया
रईस अहमद की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि वह किसी भी कथित अवैध लेन-देन का लाभार्थी नहीं थे। उनका कहना है कि वह केवल अपने नियोक्ता के निर्देश पर विशाल कुमार के साथ बैग लेकर गए थे और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से आरोपी बनाया गया है।
जमानत मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में चार्जशीट और संज्ञान आदेश को चुनौती दी है। अधिवक्ता का तर्क है कि रईस अहमद ने न तो किसी से रिश्वत की मांग की और न ही उनके पास से रिश्वत की रकम बरामद हुई। उनका कहना है कि वह केवल निर्देशानुसार राशि लेकर गए थे।
14 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI से जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी। अदालत के अगले आदेश और CBI के जवाब पर मामले की आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।