सेंट्रल मार्केट के करीब 650 प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास के लिए नीति तैयार की जा रही है। भाजपा जनप्रतिनिधियों के अनुसार व्यापारियों को नाममात्र के किराए पर लीज पर दुकानें देने की योजना है और छह महीने में आवंटन पत्र देने की प्रक्रिया शुरू होगी।
मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की जद में शहर के अन्य हिस्सों के आने की चर्चा के बीच भाजपा जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए हैं। बुधवार को सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर जनप्रतिनिधियों ने सेंट्रल मार्केट के प्रभावित व्यापारियों और लोगों के पुनर्वास की घोषणा की। इसके लिए नीति तैयार की जा रही है। शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण फिलहाल नीति का पूरा खुलासा नहीं किया गया। जनप्रतिनिधियों के अनुसार करीब 650 दुकानदारों को नाममात्र के किराए पर लीज पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी।
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आचार संहिता के कारण नीति का खुलासा नहीं
सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी ने कहा कि शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण पूरी नीति का खुलासा नहीं किया जा रहा है। सांसद अरुण गोविल ने कहा कि सेंट्रल मार्केट की समस्या के समाधान के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे।
मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
जगह चिह्नित, लीज पर मिलेंगी दुकानें
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से इस समस्या का समाधान निकाला गया है। कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने कहा कि सरकार सभी व्यापारियों के साथ है।
राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने बताया कि करीब 650 व्यापारियों के लिए सरकारी विभागों की जमीन चिह्नित की गई है। रंगोली मंडप के बराबर स्थित सामुदायिक केंद्र की जमीन पर कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना है। इसमें व्यापारियों को लीज पर दुकानें दी जाएंगी। उनके अनुसार इसके लिए कोई पैसा जमा नहीं कराया जाएगा, केवल नाममात्र का किराया लिया जाएगा।
छह महीने में शुरू होंगे आवंटन पत्र
डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि छह महीने के अंदर व्यापारियों को दुकानों के आवंटन पत्र देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मकान मालिक हो या किराएदार, सभी को लीज पर दुकानें उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने बताया कि व्यापारियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है और उन्हें बेहतर विकल्प देने के लिए सरकार काम कर रही है।
मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों की भूमिका पर भी कार्रवाई की बात
राज्य मंत्री ने कहा कि अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है और किसी भी दोषी अधिकारी को सरकार नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्णय दे चुका है कि आवासीय परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होंगी।
डॉ. तोमर ने यह भी कहा कि शहर में दिसंबर से पहले सभी जोन का री-सर्वे कराया जाएगा। उनके अनुसार मेडा बनने से पहले बने मकान उस श्रेणी में नहीं आएंगे। री-सर्वे के बाद वास्तविक स्थिति सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
2014 से शुरू होने का दावा
डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि इस समस्या की शुरुआत 2014 में सपा सरकार के समय हुई थी। उनके अनुसार आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी हाईकोर्ट गए थे और कॉम्प्लेक्स के खिलाफ शिकायत कर ध्वस्तीकरण की मांग की गई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और 2025 में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया।
उन्होंने कहा कि इसके बाद सभी जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। एक नीति तैयार कर पैसे भी जमा किए गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस नीति को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद पुनर्वास नीति के लिए दोबारा प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि सरकार की एक संस्था ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष पुनर्वास नीति रखी और उसे शासन को भेजा गया।
विपक्ष पर भय का माहौल बनाने का आरोप
डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि मेरठ में विपक्ष की ओर से भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापारियों के पुनर्वास के लिए काम कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि अवैध रूप से कब्जाई गई जमीनों को जब्त कर गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं और जरूरत के अनुसार सरकार मकान उपलब्ध कराएगी।