उन्होंने कहा कि उनकी दुकानें तो तोड़ दी गईं, अब अवैध निर्माण कराने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। सेंट्रल मार्केट के साथ ही शास्त्रीनगर योजना में भी 1468 अवैध निर्माण सर्वे में चिह्नित किए जा चुके हैं। ये भी अब रडार पर हैं।
आवास विकास परिषद ने यह सर्वे कराया था। शास्त्रीनगर में घरों में ही शोरूम, रेस्टोरेंट, अस्पताल, होटल, बैंक, सैलून, मर्चेंट स्टोर सहित तक कई प्रतिष्ठान अवैध रूप से संचालित हैं। आखिर ये कैसे बिना आवास विकास के अधिकारियों की साठगाांठ के तैयार हो गए। सेंट्रल मार्केट के नजदीक ही हाल ही में ज्वेलरी शोरूम भी खोल दिया गया। गली-गली में अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिन्हें रोका नहीं जा रहा। यदि इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई तो पूरा शास्त्रीनगर ही बेरौनक, बदरंग और खंडहर सरीखा हो जाएगा।
कॉम्प्लेक्स मामले में हाइकोर्ट ने पांच दिसंबर 2014 को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। इस पर व्यापारी सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी परदीवाला और आर. महादेवन की खंडपीठ ने 19 नवंबर को आवास विकास परिषद से 499 भवनों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इस पर विभाग ने सर्वे कर रिपोर्ट दी थी। इसमें शास्त्रीनगर योजना के 1468 भवन में व्यावसायिक गतिविधियां मिलीं। खंडपीठ ने 17 दिसंबर 2024 को सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। स्थानीय व्यापारियों को आशंका है कि अब अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों पर भी ऐसी ही कार्रवाई न हो जाए।