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सेंट्रल मार्केट : अस्पतालों से निकाले गए मरीज, बोर्ड हटाए, सामान खाली

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण व सीलिंंग की कार्रवाई से पहले दुकान से बाहर निकालकर रखा सामान।  - फोटो : Archive
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सेंट्रल मार्केट में सीलिंग के खौफ ने न केवल व्यापार, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सोमवार देर रात सीएमओ कार्यालय से मिली सूचना के बाद शास्त्रीनगर के तीन प्रमुख अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मंगलवार सुबह तक सनफोर्ड अस्पताल, वर्धमान अस्पताल और डॉ. अशोक गर्ग अस्पताल से 42 मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। कार्रवाई के डर से संचालकों ने अस्पतालों के नाम के बोर्ड, बैनर और दवाघरों का सामान तक खाली कर दिया।
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अस्पताल संचालकों के अनुसार गंभीर मरीजों की जान जोखिम में न आए इसलिए सोमवार रात से ही उन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। वहीं मंगलवार को भी कई मरीजों को आनन-फानन में एंबुलेंस के जरिए मेडिकल कॉलेज व अन्य निजी अस्पतालों में भेजा गया। सनफोर्ड अस्पताल के संचालक सुभाष प्रधान ने बताया कि 15 मरीज शिफ्ट कर दिए गए हैं। वहीं डॉ. अशोक गर्ग नर्सिंग होम से 18 मरीजों को शिफ्ट किया गया। इसके अलावा वर्धमान अस्पताल के संचालक ने बताया कि 09 मरीज शिफ्ट कर दिए गए हैं।


परिजनों का दर्द: अब कहां लेकर जाएं मरीज

1. सीलिंग की इस कार्रवाई ने तीमारदारों की चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल परिसर में बदहवासी का आलम रहा। छोटलिया पीर निवासी वसीम खान का एक्सीडेंट हुआ था उनके पैर और जबड़े में गहरी चोट है। डॉ. मनीष गर्ग उनका ऑपरेशन करने वाले थे लेकिन सील के आदेश के बाद उन्हें दूसरे अस्पताल जाने को कह दिया गया। वसीम की बहन नजमा ने अस्पताल प्रबंधन से मिन्नतें कीं कि उन्हें यहीं रहने दिया जाए लेकिन डॉ. अशोक गर्ग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिफ्ट करने का फैसला बरकरार रखा।
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2. मंजूर नगर निवासी नियाज फातिमा को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ के कारण तीन दिन पहले अशोक गर्ग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीलिंग की खबर मिलते ही अस्पताल ने उनकी छुट्टी कर दी। उनके पिता शान जैदी अब उन्हें किसी अन्य विशेषज्ञ अस्पताल ले जाने की तैयारी में जुटे थे।



भावुक हुआ स्टाफ: रोजी-रोटी पर मंडराया संकट

अस्पताल बंद होने की खबर ने वहां काम कर रहे लगभग 45 नर्सिंग स्टाफ सदस्यों को तोड़कर रख दिया। वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारी अपनी आंखों के सामने अस्पताल को खाली होता देख बिलख पड़े। नर्सिंग स्टाफ की सदस्य विमला अस्पताल परिसर में भावुक होकर रोती नजर आईं। इस दौरान सुबेश सैनी, विमला सहित दर्जनों कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर आशंकित और दुखी दिखे।



हटा दिए गए अस्पतालों के नामोनिशान

कार्रवाई के डर से मंगलवार सुबह इन अस्पतालों का नजारा बदला हुआ था। मुख्य द्वारों पर लगे बड़े बोर्ड और बैनर उतार दिए गए। दवाओं के स्टॉक को बोरियों और पेट्टियों में भरकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। जो अस्पताल कल तक मरीजों से भरे थे वहां अब सन्नाटा और दहशत पसरी हुई है।
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