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सेंट्रल मार्केट : सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण न होने पर आवास विकास से मांगा जवाब

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मेरठ। सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट में आदेश के बावजूद अवैध भवन ध्वस्त न करने पर आवास एवं विकास परिषद से जवाब मांगा है। 8 सितंबर तक आवास विकास को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। उधर दूसरी ओर आवास एवं विकास परिषद ने भी व्यापारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की तैयारी कर ली है।
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आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर स्कीम संख्या 7 के तहत ही सेंट्रल मार्केट आता है। इसमें सेक्टर-2 व सेक्टर-6 का मुख्य मार्ग मुख्य रूप से सेंट्रल मार्केट माना जाता है। आवास विकास की रिपोर्टर के मुताबिक इस स्कीम में 6379 स्वीकृत आवासीय संपत्तियां हैं। इनमें से 860 संपत्ति ऐसी हैं, जिनमें व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है। सेंट्रल मार्केट में सराफा, डेयरी, रेडीमेड गारमेंट्स, मर्चेंट स्टोर आदि हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी परदीवाला और आर. महादेवन की खंडपीठ ने 17 दिसंबर 2024 को सेंट्रल मार्केट के 661/ 6 में निर्मित कॉम्पलेक्स को तीन सप्ताह में खाली करने और दो सप्ताह में ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। आवास विकास की ओर से लगातार दुकानदारों को नोटिस दिए गए लेकिन अभी तक दुकानें खाली नहीं हुईं।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की ओर से ध्वस्तीकरण न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी। लोकेश खुराना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने 8 सितंबर तक आवास एवं विकास परिषद से अभी तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न करने पर जवाब मांगा है।
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वहीं, आवास विकास परिषद की ओर से 661/6 तथा 31 अन्य अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का टेंडर मुंबई की रिलायबल एजेंसी को दिया है। आवास विकास के अधिकारियों ने डीएम, एसएसपी को पत्र लिखकर फोर्स की मांग की है। वहीं जिला प्रशासन पूर्व में ही ध्वस्तीकरण के लिए एसीएम सिविल लाइंस को मजिस्ट्रेट नियुक्त कर चुका है। अधिकारियों का कहना है कि दुकानें खाली न करने पर मुख्यालय ने व्यापारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने के लिए दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं।
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