सीसीएसयू गांवों में तराशेगा प्रतिभाएं
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस के सभी विभागों को शैक्षिक और आर्थिक रूप से पिछड़े गांवों को गोद लेकर उनका सर्वांगीण विकास करना होगा। इस संबंध में बृहस्पतिवार को रजिस्ट्रार ने निर्देश जारी कर विभागाध्यक्षों से जल्द गांवों के नाम उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही विभागों को टीबी के मरीजों के लिए भी काम करना होगा। उन्हें फल और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना होगा। विवि से संबद्ध सभी कॉलेजों को भी कम से कम एक गांव गोद लेना होगा।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सभी विवि और कॉलेजों से गांवों को गोद लेकर वहां उच्च शिक्षा से वंचित छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने के लिए कहा था। इसके चलते रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने परिसर के सभी संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर निर्देश दिए है कि वह जिन गांवों को गोद लेंगे उनके नाम, ब्लॉक और तहसील तुरंत उपलब्ध कराएं। ताकि यह जानकारी राजभवन भेजी जा सके। गोद लिए गए गांवों में विभाग 12वीं पास छात्र-छात्राओं को चिह्नित करेंगे। गांवों के होनहार छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था करेंगे।
टीबी खत्म कराने में निभाएं भूमिका
कैंपस के सभी 34 विभागाध्यक्षों के अलावा विवि से संबद्घ कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि विवि परिक्षेत्र में आने वाले गांवों में टीबी रोग के मरीजों की जांच नजदीकी अस्पतालों में कराएं। साथ ही रोगियों को खाना और फल बांटे। कॉलेज कम से कम एक मरीज गोद लेकर उसे टीबी मुक्त कराएं। इन गांवों की सूची भी कैंपस के विभागाध्यक्षों और कॉलेजों के प्राचार्यों से मांगी गई है।
छात्राओं की एचबी जांच कराएं
कैंपस और कॉलेजों में पढ़ने वाली सभी छात्राओं के हीमोग्लोबिन (एचबी) की प्राथमिक अस्पताल में जांच करानी होगी। हीमोग्लोबिन कम होने पर उनके अभिभावकों को इसकी सूचना देनी होगी। साथ ही हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए चिकित्सीय परामर्श दिलाने को भी कहा गया है। इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वर्जन====
विवि और कॉलेजों के शिक्षक छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर इस कार्य को बखूबी करेंगे। इससे गांवों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ेगी। हर कॉलेज अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। कैंपस के सभी शिक्षक गांवों में प्रतिभा तराशेंगे। -प्रो. एनके तनेजा, कुलपति सीसीएसयू
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...तो बदल जाएगी 12 सौ गांवों की सूरत
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस में 30 से ज्यादा विभाग हैं। मेरठ और सहारनपुर मंडल में राजकीय और एडेड कॉलेजों की संख्या 68 है। करीब 1100 सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। अगर सभी विभागाध्यक्ष और प्राचार्य जिम्मेदारी निभाएं तो नौ जिलों के 1200 गांवों की सूरत बदल सकती है। यहां के संसाधन विहीन छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा लेकर आगे बढ़ सकते हैं। गांवों में प्रतिभाओं को नई दिशा मिलेगी।