चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की स्थिति को लेकर शासन ने पूरा डाटा मांग लिया है। इसमें पांच साल के छात्र-छात्राओं की संख्या के साथ ही शिक्षकों को दिए जाने वाले वेतन का भी प्रमाण मांगा है। इसको लेकर विवि की वेबसाइट पर पोर्टल का लिंक जारी किया गया है। पोर्टल पर ऑनलाइन कॉलेजों को जानकारी देनी होगी। कॉलेज में कितने पाठ्यक्रम चल रहे हैं। विवि से कोर्स के संबद्धता की तिथि के साथ ही संबद्धता के स्थाई या अस्थाई होने के बारे में जवाब मांगा गया है।
सभी सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों से विवि से अनुमोदित शिक्षकों का पाठ्यक्रम के हिसाब से ब्योरा मांगा गया है। उनके अनुमोदन का पत्र और तिथि भी मांगी गई है। पाठ्यक्रम के अनुसार छात्र-छात्राओं की पांच वर्ष की संख्या देने को कहा गया है।
इसमें वर्ष 2017--18, 2018-19 और 2019-20 के छात्र-छात्राएं शामिल हैं। किस शिक्षक को कितना वेतन दिया जा रहा है, इसकी जानकारी खाना नंबर और पैन नंबर के हिसाब से मांगी गई है। ये सारी जानकारी पोर्टर पर ऑनलाइन 25 अप्रैल तक हर हाल में देने को कहा गया है। छात्रों की हर साल की सूचना अलग-अलग प्रारूप पर देनी होगी। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि इसको लेकर पूरी जानकारी हर हाल में 25 अप्रैल तक देनी होगी। मामला कोर्ट में है।
ये है मामला
सीसीएसयू से संबद्ध मेरठ-सहारनपुर मंडल के जिलों में सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की संख्या आठ सौ से ज्यादा है। इनमें कई हजार शिक्षक और लाखों छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। एक शिक्षक ने सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में शिक्षकों की सैलरी में भारी विषमता की बात करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पूरे मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब देने को कहा है। ऐसे में इस मामले में प्रमुख सचिव शिक्षा की तरफ से सभी कुलपति और रजिस्ट्रार से इसको लेकर जवाब मांगा था।