फर्जी एडमिशन पर कॉलेज कुंडली मारकर बैठे हैं। कार्रवाई करने की जगह पत्राचार चल रहा है। विवि ने मेरठ और सहारनपुर मंडल में 997 एडमिशन को प्रथम दृष्टया फर्जी माना है। अपने स्तर की जांच में उन्हें इंगित करते हुए कॉलेजों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। वेबसाइट पर उक्त एडमिशन की लिस्ट रोल नंबर और नामवार अपलोड भी की है। कॉलेजों का कहना है विवि ने सही छात्रों को भी फर्जी करार दे दिया है।
रजिस्ट्रार दीप चंद्र ने 2014 और 2015 के एडमिशन की जांच की। फर्जी नंबर के सहारे मेरिट में जगह बनाने का विवि ने खुलासा किया था। ऐसे छात्रों को विवि ने कॉलेजों के हिसाब से शार्ट लिस्ट किया। मेरठ और सहारनपुर मंडल राजकीय और एडेड कॉलेजों में 997 एडमिशन फर्जी निकले।
विवि ने इन एडमिशन की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी। कॉलेजों को निर्देश दिया कि वह अपने स्तर से मामलों की गहनता से जांच कर कार्रवाई करे। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए। कॉलेजों की ओर से अभी कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ एडमिशन की जांच कॉलेजों ने अपने स्तर से की तो वह सही निकले। कुछ छात्रों के रजिस्ट्रेशन फार्म में नाम की जगह रोल नंबर भर दिया था।
कॉलेजों का कहना है कि विवि ने उन्हें फर्जी मान लिया, जबकि रिकार्ड उनका सही है। विवि खुद ऐसे मामलों को ठीक करे। कॉलेजों ने इन छात्रों को विवि भेजना शुरू कर दिया। विवि ने ऐसे मामलों के लिए कॉलेजों से कहा कि वह वास्तविक अभिलेखों से मिलान कर चेक कर ले। यह पता चलता है कि छात्र की मंशा धोखा देने की नहीं थी तो ऐसे मामलों में नियमोचित निर्णय करे।